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Karnal News: सर्दी में आयुर्वेदिक दवाओंं पर बढ़ा भरोसा, आयुष ओपीडी रोजाना पहुंच रहे 100 मरीज

Sat, 17 Jan 2026 02:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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एएमओ डॉ. सुनील
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। सर्दी बढ़ने के साथ जिले में आयुष पद्धतियों पर लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है। बढ़ती ठंड के साथ जब जुकाम, खांसी, जोड़ों के दर्द और एलर्जी आम हो जाती है, तब हर मरीज यही चाहता है कि इलाज असरदार भी हो और सुरक्षित भी। शायद यही वजह है कि अब लोग बार-बार एलोपैथी दवाएं लेने के बजाय आयुर्वेद और होम्योपैथी की ओर रुख कर रहे हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और बीमारी की जड़ पर काम करने वाले इलाज की तलाश में नागरिक अस्पताल की आयुष ओपीडी इन दिनों मरीजों से भरी नजर आ रही है, जहां रोजाना औसतन 100 लोग उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
आयुष ओपीडी में आने वाले मरीजों में करीब 60 मरीज जुकाम, सर्दी-खांसी, एलर्जी, जोड़ों के दर्द और शरीर में जकड़न जैसी समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक उपचार ले रहे हैं, जबकि लगभग 40 मरीज होम्योपैथी पर भरोसा जता रहे हैं जिनमें सबसे अधिक स्त्री रोग से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। जबकि सामान्य दिनों में केवल 60 से 70 कुल मरीज आ रहे थे।
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नागरिक अस्पताल के आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुनील ने बताया कि सर्द मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। ऐसे में बार-बार दवा लेने से बचने के लिए लोग आयुष पद्धतियों को अपनाना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। आयुर्वेदिक दवाएं शरीर की प्रकृति के अनुसार काम करती हैं और रोग की जड़ पर असर डालती हैं जबकि होम्योपैथी में हार्मोनल और स्त्री रोग संबंधी समस्याओं का बिना दुष्प्रभाव के लंबे समय तक इलाज संभव है।

- नई दवाएं भी हुई शामिल
आयुर्वेद पर बढ़ते भरोसे और मरीजों की संख्या को देखते हुए नागरिक अस्पताल के आयुष विभाग में पिछले दो महीनों में 60 तरह की और दवाएं जुड़ी है जिससे संख्या बढ़कर अब करीब 100 पहुंच गई हैं। इनमें फलघृत्त, सुपारी पाक,निशामलकी चूर्ण, कुटजारिष्ट, विषामलेप और ब्राह्म रसायन जैसी कई दवाइयां शामिल हैं जो चमड़ी, पेट, स्त्री रोग बीमारियों में काम आ रही हैं।
- डिस्पेंसरी बढ़ गई लेकिन दवाओं का बजट वही
डॉ. सुनील का कहना है कि लोगों के दवाओं की ओर बढ़ते रुझान से दवा लेने वालों की संख्या तो बढ़ रही है लेकिन जिले में पिछले साल करीब 20 नई डिस्पेंसरी और जुड़ी हैं जिस कारण अब जिले में करीब 50 डिस्पेंसरी हैं। इससे वर्तमान में जो पहले से निर्धारित बजट है, उसी से दवाओं का स्टॉक भी विभाजित हो रहा है। बीतते समय के अनुसार, ओपीडी में बढ़ते मरीजों के बीच दवाओं के अधिक स्टॉक की जरूरत पड़ सकती है। अब तक मरीजों को कोई परेशानी नहीं आई लेकिन बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार को बजट बढ़ाने की जरूरत है।



- आयुर्वेदिक दवाओं से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
एएमओ डॉ. सुनील के अनुसार, आयुर्वेदिक उपचार केवल लक्षणों को दबाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इम्यूनिटी बढ़ाने और भविष्य में बीमारी से बचाव पर भी काम करता है। सर्दी-खांसी और एलर्जी के मामलों में काढ़ा, चूर्ण और आयुर्वेदिक दवाएं शरीर की अंदरूनी ताकत बढ़ाती हैं। वहीं, होम्योपैथी में दवाएं मरीज की संपूर्ण स्थिति को ध्यान में रखकर दी जाती हैं, जिससे इलाज अधिक प्रभावी होता है। महिलाएं मासिक धर्म की अनियमितता, हार्मोनल असंतुलन, कमजोरी, सिरदर्द, एलर्जी और बार-बार होने वाले संक्रमण जैसी समस्याओं के लिए आयुष पद्धति को प्राथमिकता दे रही हैं।
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आयुष के प्रति बढ़ता भरोसा लोगों में बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता का भी परिणाम है। अब मरीज केवल त्वरित राहत नहीं, बल्कि सुरक्षित और दीर्घकालिक इलाज चाहते हैं। यही वजह है कि सरकारी अस्पताल की आयुष ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
- डॉ. सुनील, एएमओ, जिला नागरिक अस्पताल
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