किसान आंदोलन से कई राज्यों में प्रभावित हुई परिवहन व्यवस्था की वजह से सब्जी मंडियों में फलों की पहुंच नहीं हो पा रही है। नतीजतन कई प्रकार के फल आम आदमी की पहुंच से दूर हो गए हैं। इनके दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। हालत यह है कि करनाल की सब्जी मंडी में रोजाना तीन से चार गाड़ी सेब की खपत है, जबकि दो दिसंबर के बाद नौ नवंबर को एक गाड़ी सेब कश्मीर से करनाल पहुंचा। एक गाड़ी में करीब 10 टन सेब होता है। रास्ते जाम और आंदोलनों की वजह से ट्रांसपोर्टरों ने भाड़ा पांच गुना तक बढ़ा दिया। इससे फल व्यापारियों के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो गई।
विदेशों से आयात होने वाले फल जो मुंबई व चेन्नई की बंदरगाहों से आते थे, वह अब बहुत ही कम मात्रा में करनाल पहुंच रहे हैं। वाहन चालक यदि गाड़ी को दूसरे रास्तों से लाते हैं तो दूरी बढ़ने से माल भाड़ा बढ़ रहा है। नासिक का अंगूर फिलहाल 300 रुपये किलो पड़ रहा है, जबकि 20 दिन पहले इसके दाम 120 से 150 रुपये किलो तक थे। कश्मीरी सेब आंदोलन से पहले 800 रुपये था जो अब 1100 से 1200 रुपये तक पहुंच गया है। नासिक से टमाटर की आवक शुरू हो गई, लेकिन गाड़ियां आ नहीं रही। 22 किलो की टमाटर क्रेट का दाम 800 रुपये तक पहुंच गया है। फलों में इंपोर्टेड आम 200 रुपये किलो था जो अब 300 रुपये किलो हो गया है। लीची 700 रुपये से 950 रुपये किलो हो गई। केला जो 15 से 20 दिन पहले 350 रुपये क्रेट (दस दर्जन प्रति क्रेट) दाम था वह अब 500 रुपये क्रेट तक पहुंच गया।
व्यवसायी बोले-पांच गुना बढ़ा किराया
सब्जी मंडी के फल व्यवसायी कपिल शर्मा ने बताया कि जो माल यहां सस्ते होते थे, वह अब महंगे हो गए। गाड़ियों का किराया एक रुपये नग से पांच रुपये नग तक हो गया है। फलों में दिल्ली से अनार, तरबूज, चीकू, संतरा इत्यादि आते थे, जिनके 20 प्रतिशत दाम बढ़ गए। इस बार पंजाब में कीनू की बंपर उपज है। दूसरी मंडियों में सप्लाई नहीं हो पाने के कारण कीनू पिट गया। हरियाणा में यह 10 से 12 रुपये किलो बिक रहा है। अच्छी क्वालिटी का कीनू 20 से 22 रुपये किलो बिक रहा था। जो गाड़ियां दक्षिण भारत से दिल्ली से होते हुए आती थीं वह अब जयपुर की साइड से हरियाणा व पंजाब की मंडियों में आ रही हैं। कश्मीर में सेब उत्पादक किसान परेशान हैं। समय से पहले अकस्मात बर्फबारी होने और सेब का स्टॉक रुक जाने के कारण उनकी आर्थिक हालत दयनीय हो गई। रास्तों में जहां-तहां खड़ी गाड़ियों में सेब सड़ रहा है। बहुत बड़े स्तर पर नुकसान हो रहा है।