संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। भारत सरकार के स्वच्छता अभियान-2 के अंतर्गत कृमि खाद तकनीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण विषय पर तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र में हुआ। कार्यक्रम राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को खेती व पशुपालन से उत्पन्न कृषि अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करते हुए उच्च गुणवत्ता की वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करने की तकनीक सिखाना था, ताकि मृदा की उर्वरता बढ़ाई जा सके, फसल उत्पादन में सुधार हो, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सके और ग्रामीण स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा सके।
कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ. पंकज कुमार सारस्वत ने किसानों को जैविक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि गुणवत्तायुक्त वर्मी कम्पोस्ट में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, सल्फर व पोटाश जैसी महत्वपूर्ण तत्व उचित मात्रा में पाए जाते हैं। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. राजेश कुमार मीणा ने किसानों से कृमि खाद को अपनाकर प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान-2 में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कैंचुआ खाद के उपयोग से भूमि के भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों में सुधार आता है। भूमि की जल संरक्षण क्षमता बढती है व मिट्टी में पोषक तत्वों और कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि होती है।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने वर्मी कम्पोस्टिंग से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं, सरकारी योजनाओं व उद्यमिता के अवसरों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों ने कृषि अपशिष्टों के सदुपयोग के लिए कृषि खाद अपनाने की शपथ ली और सभी को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।