करनाल। पुलिस अधीक्षक गंगाराम पूनिया की अध्यक्षता में पुलिस अधिकारियों की गोष्ठी में नए कानूनों की बारीकियों को समझाया गया। जिसमें जिला न्यायवादी डॉ. पंकज सैनी ने कहा कि नए कानूनों में प्रत्येक कार्रवाई के लिए समय सीमा निर्धारित की गई है। इसमें तीन वर्ष से कम की सजा वाले छोटे अपराधों में 60 वर्ष से अधिक आयु वाले आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उप पुलिस अधीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही गंभीर अपराध की सूचना पर घटनास्थल पर बिना विचार किए शून्य क्रमांक पर एफआईआर दर्ज करनी होगी।
गोष्ठी में नए कानूनों के महत्वपूर्ण पहलुओं पर मंथन किया गया। बताया गया कि भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 व साक्ष्य अधिनियम 01 जुलाई, 2024 से लागू हो गए हैं। प्रत्येक कार्रवाई के लिए निश्चित समय सीमा निर्धारित की गई।
जिला न्यायवादी ने बताया कि नए कानून के तहत पुलिस संगीन मामलों में 60 दिन के अंदर-अंदर दोबारा से रिमांड ले सकती है। संगठित अपराध जो बार-बार अपराध करते हैं, ऐसे मामलों में अब कठोर सजा फांसी, उम्रकैद के साथ-साथ कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना होगा, इनमें फिरौती मांगना, साइबर अपराध, किडनैपिंग, जमीनों पर कब्जा करना जैसे अपराध भी शामिल हैं। गोष्ठी में बताया कि नए कानून में संगठित अपराध यानी संगठित गैंग, सिंडिकेट चलाने वाले गिरोह के आरोपियों द्वारा अपराध कर काली कमाई से अर्जित की संपत्ति को अटैच करने के प्रावधान भी बताए गए। इसमें अब जांच अधिकारी, पुलिस अधीक्षक के माध्यम से न्यायालय में अपील कर आरोपियों की इस प्रकार से अर्जित की संपत्ति अटैच करवा सकेंगे।