चकबंदी में अपनी खरीदी हुई जमीन गंवा चुके पांच गांवों के किसान की प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिलने के बाद आर पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। तीसरे दिन अनशन पर बैठीं महिलाओं ने ऐलान कर दिया कि अगर उनकी जमीन से किसी ने धान की फसल काटने की कोशिश की तो वे किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं होने देंगे।
महिलाओं व ग्रामीणों ने तीसरे दिन भी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इंसाफ की गुहार लगाई। बुधवार को सुबह पांच गांव की महिलाओं, बच्चों व ग्रामीणों ने गांव लालूपुरा में प्रदर्शन किया और लोगों से भूमाफिया के खिलाफ लड़ने के लिए आगे आने की गुहार लगाई। बाद में सभी प्रदर्शनकारी गांव की चौपाल में एकत्रित हुए।
दूसरे ग्रामीणों ने भी प्रदर्शनकारियों का साथ देने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद पूरा गांव अनशन स्थल पर पहुंच गया। बुधवार को गांव अमृतपुर कलां की मूर्ति देवी, चंद्रवती, जगोदेवी, चंपा, संतोष, बिशनी, मेवा देवी, नन्ही, चमेली सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि सैनी समाज परिवार ने सन 1962 में 544 बीघे जमीन खरीदी थी।
जमीन खरीदने के बाद उस जमीन में फसलें उगाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। 1965 की चकबंदी पूरी तरह से दुरुस्त थी। 1995 में दोबारा हुई चकबंदी में अमृतपुर के एक चकबंदी अधिकारी ने किसानों से जमीन हड़पने का काम शुरू कर दिया। चकबंदी में सारी जमीन हड़प ली गई और उनके पास मात्र सात बीघे जमीन बची।
78 वर्षीय चंदगी ने बताया कि भूमाफिया की मंशा थी कि सैनी समाज के किसानों को पूरी तरह से नष्ट किया जा सके। एक माह पूर्व इन्हीं लोगों ने बची हुई सात कनाल पर भी कब्जा करने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण भूमाफिया को बैरंग लौटना पड़ा। पुलिस से जब न्याय की गुहार लगाई गई तो पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपेक्षा उनके ही 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।
इनमें पांच लोगों को तो बेवजह फंसाया गया है। आंदोलन संचालक प्रदीप कुमार ने कहा कि प्रशासन को बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई मदद नहीं मिल रही है। अब भूमाफिया व उससे जुड़े लोगों के साथ ग्रामीणों ने आर पार की लड़ाई का मन बना लिया है। खेतों में खड़ी धान की फसल को किसी भी कीमत पर नहीं काटने दिया जाएगा।