संवाद न्यूज एजेंसी
घरौंडा। गांव फरीदपुर से अस्थियां हरिद्वार में प्रवाहित करने जा रहे परिवार के तीन महिलाओं सहित छह लोगों की मौत होने के बाद वीरवार को गांव में सन्नाटा पसरा रहा। बुधवार की रात 9 बजे गांव के श्मशान में मृतक मोहिनी, उनके बेटे पियूष और कार चालक शिवा का अंतिम संस्कार कर दिया गया। हर आंख नम थी। ग्रामीणों ने वीरवार को गांव में दशहरा का कोई आयोजन नहीं हुआ। रामलीला कमेटी ने रावण दहन कार्यक्रम स्थगित कर दिया। रामलीला का मंचन तक नहीं किया गया।
संस्कार में हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण भी पहुंचे। पूरा गांव उमड़ पड़ा। गांव के लोग महेंद्र के घर सांत्वना देने के लिए पहुंच रहे हैं। पीड़ित परिवार को ढांढ़स बंधाने के लिए जैसे पूरा गांव उमड़ा हुआ। गांव के सरपंच मनोहर लाल ने बताया कि रात में गांव में शव पहुंचे तो कई घरों में भोजन भी नहीं बना। गांव में किसी भी परिवार ने दशहरे का त्योहार नहीं मनाया। गांव में दशहरे मानने की परंपरा बहुत पुरानी है। गांव में एसडी मंदिर के पास हर वर्ष दशहरे का आयोजन होता है। इस बार रामलीला कमेटी ने रावण दहन न करने का फैसला किया। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष खैराती लाल ने बताया कि बुधवार को जैसे ही गांव में सड़क हादसे में गांव के लोगों की मौत होने की सूचना मिली तो उसी समय ही रामलीला न करने व रावण दहन न करने का फैसला कमेटी ने ले लिया था।
गांव फरीदपुर निवासी 51 वर्षीय महेंद्र जुनेजा की बीमारी के चलते दस दिन पहले मौत हो गई थी। बुधवार को सुबह करीब 5 बजे परिवार महेंद्र की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने के लिए दो गाड़ियों में सवार होकर हरिद्वार के लिए रवाना हुए। घर से निकले हुए अभी लगभग एक घंटा ही हुआ था कि परिजन को दिल दहला देने वाली खबर मिली। उनकी एक कार हादसे का शिकार हो गई। कार में मृतक महेंद्र की पत्नी, दो बेटे, जीजा और दो बहनें सवार थीं। चालक समेत छह लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मरने वालों में महेंद्र की पत्नी मोहिनी (47 वर्ष), जीजा राजेंद्र (61 वर्ष), बहन विन्नी (56 वर्ष), बहन अंजू (45 वर्ष), बेटा पियूष (19 वर्ष) और कार चालक शिवा शामिल हैं। महेंद्र और मोहिनी का छोटा बेटा हार्दिक गंभीर रूप से घायल हो गया। वह पानीपत के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। पूरे परिवार में केवल हार्दिक ही जीवित बचा है।
रात 8:30 बजे पहुंचे शव
बुधवार की रात लगभग 8:30 बजे गांव में मां, बेटे व चालक शव एंबुलेंस से पहुंचा। रात में अंतिम संस्कार कर दिया गया। लोगों की भीड़ इतनी थी कि श्मशान घाट में पांव तक रखने की जगह नहीं बची थी। गांव के लोग व रिश्तेदार बड़ी मुश्किल से परिवार के लोगों को संभाल रहे थे।
चार को होगा चौथा
महेंद्र की मृत्यु 22 सितंबर को हुई थी। मंगलवार को परिवार के लोगों ने चौकी का आयोजन किया और बुधवार की सुबह अस्थियां लेकर हरिद्वार के लिए निकले। महेंद्र के रिश्तेदार ने बताया कि महेंद्र की 4 अक्तूबर की क्रिया रखी गई थी। अब महेंद्र के साथ-साथ उसकी पत्नी और बेटे का चौथा भी शनिवार को रखा गया है।
शाहाबाद। पानी की जांच करते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी। संवाद