संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। भाई दूज वीरवार को मनाया जाएगा। इसमें तीन शुभ योग बन रहे हैं। तुला लगन में सुबह 10:47 से 12:28 तक तिलक करना विशेष लाभकारी होगा। पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि भाई दूज कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को होती है। इसे यम दूती भी कहा जाता है। भाई दूज 22 अक्टूबर को रात 08:16 बजे प्रारंभ होकर वीरवार रात 10:46 बजे तक रहेगी। भाई दूज के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:45 से 05:36 बजे तक है। यह स्नान के लिए उत्तम समय माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:43 से दोपहर 12:28 तक है। इसमें तुला लगन होगा। यह न्याय का भी प्रतीक है। अमृत काल में शाम को 06:57 से 08:45 तक मुहूर्त है।
उन्होंने कहा कि भाई को तिलक लगाते समय उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ मुंह कर बैठना चाहिए। उत्तर दिशा धन और अवसरों की दिशा मानी जाती है। इस दिशा में तिलक करने से भाई के कॅरिअर और आर्थिक जीवन में स्थिरता आती है। पूर्व दिशा ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा मानी जाती है।
शास्त्री ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार यमराज शनिदेव के बड़े भाई हैं। उनकी दो बहन यमुना और भद्रा हैं। यमुना का उद्गम स्थल उत्तरकाशी के यमुनोत्री से माना जाता है। वहीं उत्तरकाशी के नचिकेता ताल में यमराज की गुफा है। जिसका रास्ता पाताल लोक तक जाने की मान्यता है। मान्यता है कि यमराज हर साल भैया दूज पर अपनी बहन यमुना से मिलकर यह पर्व मनाते हैं और उसके बाद वापस लौट जाते हैं।
भाई को टीका करने की विधि
भाई दूज पर बहन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें। वे एक थाली में गोला, कलावा, रोली, अक्षत, दीया और मिठाई रखें। सबसे पहले थाली की पूजा करें और फिर शुभ मुहूर्त में थाली में रखी रोली भाई के माथे पर लगाएं। इसके बाद हाथ पर कलावा बांधकर दीपक से आरती उतारें और भाई का मुंह मीठा कराएं।