करनाल। इसे सरकारी सिस्टम का हिस्सा कहें या अधिकारियों की इच्छाशक्ति। नेशनल हाईवे-44 से सेक्टर-9 और भाजपा कार्यालय को जोड़ने वाली लिंक रोड का निर्माण महज नौ दिनों में ही हो गया जबकि शहीद ऊधम सिंह चौक से मेरठ रोड तक के आउटर बाईपास का निर्माण कार्य नौ माह से अधर में है। जुलाई, 2025 से लेकर अभी तक महज 30 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है।
सेक्टर-9 की लिंक रोड को बनाने के लिए खोदाई के समय पांच जेसीबी लगाई गईं। तुरंत ठेका देते हुए दिन-रात काम करके सीमेंटेड टाइलों से रास्ता बना दिया गया है। आउटर बाईपास की एक तरफ की सड़क करीब पांच माह तक उखाड़कर ही छोड़ दी गई। रोड़ा डालने के बाद अब उस पर लेयर बिछाने का काम अब शुरू हुआ है। हालांकि अब दोनों तरफ की सड़क निर्माण कार्य को अप्रैल माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन जिस रफ्तार से काम चल रहा है। ऐसा लग नहीं रहा कि यह कार्य इस समय में पूरा हो पाएगा।
इधर सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। एडवोकेट संदीप राणा, तेजपाल और शुभम का कहना है कि भले ही दोनों सड़कों की स्थिति अलग है लेकिन इससे यह साबित होता है कि जब अधिकारियों पर दबाव बने तो काम तेजी से भी पूरा किया जा सकता है। अधिकारियों ने एक सड़क का काम दिन-रात में निपटाया जबकि दूसरी जगह सुस्त चाल से काम चलता है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
आउटर बाईपास के साथ लगती करीब 20 कॉलोनियों के निवासी और बाईपास से रोजाना गुजरने वाले लोग गड्ढों के कारण परेशानी झेल रहे हैं। सेक्टर-9 की लिंक रोड का निर्माण सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद हुआ है। स्थानीय उपायुक्त उत्तम सिंह, विधायक जगमोहन आनंद और मेयर रेणू बाला गुप्ता को दबाव बनाते हुए आउटर बाईपास के कार्य को पूरा कराना चाहिए।
लिंक रोड : जमीन ट्रांसफर से लेकर निर्माण तक हुआ
सेक्टर-9 स्थित भाजपा कार्यालय की कॉलोनी को नेशनल हाईवे-44 से जोड़ने के लिए एचएसवीपी ने आईटीआई से जमीन खरीदी। इसके बाद ही करीब 1100 वर्ग मीटर लंबे रास्ते का निर्माण किया गया। मुख्यालय स्तर पर खरीद प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सड़क का निर्माण हुआ। प्राधिकरण के एसई धर्मबीर ने बताया कि छोटा रास्ता बनाना था, इसलिए शीघ्रता से ही काम पूरा किया गया। अब आईटीआई की दीवार बनाई जा रही है। विदित हो कि दिसंबर माह में सेक्टर-9 में स्थित भाजपा कार्यालय को नेशनल हाईवे-44 से जोड़ने वाले रास्ते को तोड़ने का सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आया था। करीब 40 पेड़ काटकर बनाए इस रास्ते पर दोबारा हरियाली करके ग्रीन बेल्ट विकसित करने का आदेश था। इसके बाद ही नया रास्ता बनाया और पुराने रास्ते की जगह पर पौधे लगाए गए।
आउटर बाईपास : डेडलाइन से भी 4 माह ऊपर बीत चुके
शहीद ऊधम सिंह चौक से लेकर मेरठ चौक तक की 4.8 किलोमीटर लंबी सड़क को स्मार्ट रोड के रूप में विकसित करने के लिए नगर निगम ने 28 जुलाई को विधायक जगमोहन आनंद और मेयर रेणू बाला गुप्ता से शिलान्यास कराया था। कुल 11.50 करोड़ रुपये से दो चरणों में विकसित होने वाली सड़क के निर्माण कार्य की शुरुआत में इसे नवंबर माह तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन चार माह अधिक बीत चुके हैं। ऊधम सिंह चौक से मेरठ रोड की ओर जाने वाले रास्ते को उखाड़ने के बाद रोड़ा बिछाने का काम भी अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। जबकि दूसरी तरफ का रास्ता भी बनाया जाना है। स्मार्ट रोड के रूप में विकसित करने के लिए यहां साइकिल चलाने वालों के लिए अलग से ट्रैक तैयार करने की भी योजना है।
आउटर बाईपास निर्माण पहले बरसात, प्रदूषण के कारण लगा ग्रैप व सर्दी को कारण रुका रहा। अब फिर काम शुरू हो गया है। संबंधित एजेंसी पर पेनल्टी भी लगाई है। हमने खुद मौके पर जाकर जांच की थी, जहां-जहां खामियां नजर आईं, वहां मौके पर ही सुधार करने के निर्देश दिए गए। निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। अब काम को अप्रैल माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। - डॉ. वैशाली शर्मा, आयुक्त नगर निगम