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हालात बिगडे़ तो एसी से निकलीं विधायक और सीएमओ

Thu, 26 Sep 2013 10:43 PM IST
करनाल
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जिले में डेंगू व मलेरिया का प्रकोप निरंतर बढ़ने से जिले में आठ लोगों की मौत और 61 लोगों को पुष्टि होने के बाद वीरवार को विधायक व स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली। इसके बाद एयरकंडीशन ऑफिस से निकलकर अस्पताल में मरीजों का जायजा लेने सुमिता सिंह पहुंचीं।
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अस्पताल में जाकर डेंगू की बीमारी के बारे में डॉक्टरों से जानकारी ली व अस्पताल में दाखिल मरीजों का हाल-चाल जाना और क्षेत्र में फोगिंग कराने के आदेश दिए। जिले में आठ लोगों की डेंगू से मौत होेने व मरीजों की संख्या बढ़ने के समाचारों के बावजूद भी विधायक सुमिता सिंह व सिविल सर्जन डॉ. वंदना भाटिया ने मरीजों का हालचाल जानने की जहमत नहीं उठाई।

मीडिया की ओर से बार-बार मामले को उजागर करने पर वीरवार को अचानक विधायक सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचीं और सिविल सर्जन डॉ. वंदना भाटिया से जानकारी हासिल की। अधिकारियों के हरकत में आने के बाद शहर में फोगिंग का असर भी देखने को मिला।
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विधायक ने सिविल सर्जन डॉ. वंदना भाटिया को निर्देश दिए कि अस्पताल मेें कोई भी व्यक्ति अपना काम लेकर आए तो उसका कार्य जल्द किया जाए। यदि कोई डॉक्टर किसी कारण से छुट्टी पर है तो उसकी जगह कोई दूसरा डॉक्टर भेजा जाए ताकि मरीजों को दिक्कत न हो।

सिविल सर्जन ने विधायक को बताया कि डेंगू पर अंकुश लगाने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। जैसे-जैसे लोग जागरूक होंगे तो यह बीमारी नहीं होगी। देखने में आया है कि कई घरों में प्रयोग किए जा रहे फ्रीजों में भी मच्छर का लारवा बन रहा है।

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग क्या करे। सिविल सर्जन ने विधायक को बताया कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा सामान्य अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए दवाइयां उपलब्ध हैं। मरीजों को चाहिए कि वे अपना उपचार सामान्य अस्पताल में ही आकर करवाएं।

डेंगू के मरीजों को यदि खून की जरूरत है तो ब्लड बैंक से उन्हें खून भी मुहैया करवाया जा रहा है। अब तक जिले में केवल 61 डेंगू के मरीजों की पहचान हुई है, जोकि पिछले वर्ष से ज्यादा हैं। विधायक ने बताया कि अस्पताल की विशेष कमेटी के पास करीब 1 करोड़ रुपया जमा है।

उन्होंने सफाई व्यवस्था के लिए सीएमओ को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल की सफाई दुरुस्त हो। उन्होंने उपायुक्त विकास यादव को भी फोन के माध्यम से अवगत करवाया कि शहर की नालियों की सफाई के लिए नगर निगम के कर्मचारियों को निर्देश दें ताकि मलेरिया व डेंगू जैसी बीमारी न पनप सके। इस अवसर पर पार्षद विनोद तितोरिया, सुदर्शन कालड़ा, सतीश गुलाटी, रामचंद्र, बलबीर सिंह, भगवान दास अग्गी उपस्थित थे।

नीलोखेड़ी में भी संदिग्ध डेंगू के मरीज
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 61 मरीजों में डेंगू के लक्षण पाए गए हैं। विभाग के आंकड़ों में प्राइवेट अस्पतालों में दाखिल मरीज शामिल नहीं हैं। नीलोखेड़ी कस्बे में डेंगू के अनेक मरीज चंडीगढ़ से भी इलाज करवा चुके हैं और करवा रहे हैं।

इनमें से अधिकतर मरीज अस्पताल एरिया, किसान बस्ती, शांति नगर व गोराया फार्म के हैं। अस्पताल एरिया की एक महिला सरोज बाला 55 वर्षीय की तो संदिग्ध बुखार से मौत भी हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग ने नीलोखेड़ी के सभी क्षेत्रों में फोगिंग भी की है। स्वास्थ्य विभाग ने रक्त के नमूने भी लिए हैं लेकिन अभी तक डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरी तरफ अस्पताल एरिया निवासी सरोज बाला की 19 सितंबर को संदिग्ध बुखार से मौत हो गई थी। रामप्यारी को बुखार की शिकायत होने पर नीलोखेड़ी के प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। अचानक तबीयत बिगड़ने से उसे करनाल रेफर कर दिया गया लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

अस्पताल एरिया के रामस्वरूप चोपड़ा व किसान बस्ती के सुरेंद्र कुमार और गोराया फार्म की एक महिला सुरेंद्र कौर चंडीगढ़ से इलाज करवाने के बाद वापस नीलोखेड़ी लौट आए हैं। अस्पताल एरिया के वेदप्रकाश का चंडीगढ़ में अभी भी इलाज चल रहा है। एसएमओ केबी मेहता का कहना है कि नीलोखेड़ी में फोगिंग करवाई गई है।

असंध में तीन को डेंगू
क्षेत्र में डेंगू ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं और अभी तक तीन मरीजों को डेंगू की पुष्टि हुई है। दो संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए दिल्ली लेबोरेट्री में भेजे गए हैं।

वहीं, इलाके में डेंगू की दस्तक से खौफज़दा लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से दवा छिड़कने और अन्य जरूरी कदम उठाने की मांग की है। नगर के एक निजी अस्तपाल में वीरवार को दाखिल हुए मरीजों के प्लेटलेटस काफी कम हो रहे हैं, जिसकी वजह से डॉक्टरों ने उन्हें चंडीगढ़ पीजीआई जाने की सलाह दी है।

तरावडी में भी डेंगू और मलेरिया से सहमे लोग
मच्छरों की मार से पूरा शहर परेशान है। डेंगू का डंक भी लगातार तीखा हो रहा है। संदिग्ध डेंगू से पीड़ित आधा दर्जन लोग निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की नजर में वहां कोई भी व्यक्ति डेंगू पीड़ित नहीं है।

यहां से किसी ने भी अपना इलाज कल्पना चावला मेडिकल कालेज में नहीं करवाया है। यही नहीं, स्वास्थ्य विभाग ने किसी भी मरीज को डेंगू पीड़ित होने से साफ इंकार किया। डेंगू से डरे लोग प्रशासन से लगातार फोगिंग की मांग कर रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग तरावड़ी में बिना किसी डेंगू पीड़ित की पुष्टि के फोगिंग करवाने को तैयार नहीं है।

शहर के हर कोने से लगातार संदिग्ध डेंगू पीड़ित होने के मामले आ रहे हैं और अधिकतर लोग अब सरकारी इलाज पर विश्वास नहीं करके निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं और बाकी डरे लोग अपने घरों में मच्छरों से बचाव के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं और साथ ही शहर में फोगिंग की मांग भी हो रही है।

इसके लिए लोगों ने नगरपालिका सचिव से मिलकर गुहार लगाई है, जिस पर नगरपालिका सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को लिखित व फोन पर हरसंभव सहयोग देने के लिए कहा है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। लोगाें में स्वास्थ्य विभाग के इस रवैये के प्रति गहरा रोष है।

स्वास्थ्य विभाग बार-बार चेतावनी दे रहा है कि कहीं भी पानी खड़ा नहीं होने दें लेकिन शहर के बीच से गुजर रहे बरसाती नाले व गंदे पानी को ड्रेन को बंद करना मुश्किल है, यही हाल काटजू नगर के सामने पड़े गंदे पानी के जोहड़ का है, जिसमें हर समय पानी भरा रहता है और मच्छरों की भरमार भी रहती है।

ऐसे में डेंगू से कैसे बचा जाए, इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग के पास भी नहीं है। मलेरिया विभाग की अधिकारी डॉ. अनीता अग्रवाल ने कहा कि तरावड़ी से अभी किसी भी डेंगू रोगी की पुष्टि नहीं हुई है और फोगिंग करवाने का लाभ इसलिए नहीं है कि इसका असर तो मात्र चार दिन तक ही रहता है, इसलिए यदि डेंगू से बचना है तो लोगों को स्वयं ही अपनी सुरक्षा का ख्याल रखते हुए कही भी पानी इकट्ठा नहीं होने देना होगा।

सिविल सर्जन यूटिलिटी कोर्ट में तलब
डेंगू के बढ़ते मामलों पर रोक नहीं लगाए जाने पर पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए 30 सितंबर को सिविल सर्जन व नगर सुधार मंडल को तलब किया है।

अब दोनों अधिकारी 30 सितंबर को पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट में अपना जवाब पेश करेंगे। आरटीआई कार्यकर्ता एडवोकेट राजेश शर्मा, एडवोकेट राहुल मोहन, उमेश चानना और करीब 20 अन्य वकीलों ने पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट के समक्ष केस दायर कर कहा कि स्वास्थ्य विभाग जानलेवा डेंगू को रोक नहीं पा रहा।

बीमारी लगातार बढ़ रही है और इसकी मुख्य वजह विभाग की लापरवाही है। स्वास्थ्य अधिकारी संजीदगी से कार्य नहीं कर रहे, जिस वजह से लोग असमय मर रहे हैं। समय रहते बीमारी को रोकने के लिए कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। डेंगू महामारी का रूप लेता जा रहा है पर स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि स्थिति नियंत्रण में है।

डेंगू के मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा और लोग दहशत में हैं। बीमारी से परेशान मरीज अस्पताल की तरफ रुख कर रहे हैं, पर उनका सही इलाज नहीं हो रहा। अस्पताल में खून की भी कमी हो गई है, जिससे आपात स्थिति पैदा हो गई है। फोगिंग पर भी स्वास्थ्य विभाग ने नियम थोप दिए हैं और बीमारी फैलने वाले हर क्षेत्र में फोगिंग नहीं कराई जा रही है।

मुगल केनाल पर नगर सुधार मंडल ने पानी रोका
नगर सुधार मंडल की ओर से मुगल केनाल का पानी रोके जाने पर कहा गया है कि गंदा पानी एक स्थान पर जमा हो गया है और यहां जानलेवा मच्छर पनप रहे हैं। इसकी वजह से मच्छर जनित रोगों में वृद्धि हो रही है।

यदि इसे जल्द ही नहीं खोला गया तो शहर के लोगों का मच्छर जीना दूभर कर देंगे। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए पब्लिक यूटिलिटी कोर्ट के चेयरमैन एसपी सिंह ने सिविल सर्जन व नगर सुधार मंडल ट्रस्ट के इंजीनियर को 30 सितंबर को तलब होने के आदेश दिए हैं।

बढ़ रहे डेंगू और मलेरिया के रोगी
आए दिन जिले में डेंगू व मलेरिया के रोगियों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। दोनों बीमारियों के फैलने से जिले के लोग सहमे हुए है। डेंगू व मलेरिया के रोगियों की बढ़ती संख्या से स्वास्थ्य विभाग ने वीरवार को शहर में फोगिंग भी कराई।

यदि वीरवार तक डेंगू व मलेरिया के रोगियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गत वर्ष के आंकड़े इस वर्ष से कम है लेकिन अब तक 1128 केस मलेरिया के सामने आ चुके हैं। गत वर्ष इनकी संख्या दो हजार थी। डेंगू के 61 केस सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि वर्ष 2010 में डेंगू के रोगियों की संख्या 72 थी।

61 डेंगू रोगियों की पुष्टि 272 रोगियों की जांच करने से हुई है। 38 रोगियाें की रिपोर्ट आना बाकी है। यह आंकड़े सरकारी हैं। यदि इनमें निजी अस्पतालों में उपचार ले रहे रोगियों की संख्या जोड़ दी जाए तो इनकी संख्या हजारों में पहुंच जाती है। शुक्रवार तक 38 रोगियाें की रिपोर्ट आने के बाद डेंगू के रोगियाें की संख्या बढ़ने की संभावना है।

पिछले तीन दिनों के आंकड़ों को देखे तो लिए गए सैंपलों से 7 लोगों की रिपोर्ट में डेंगू की पुष्ठि हुई है। यदि हम मलेरिया की और नजर डालें तो इनकी संख्या 17 और बढ़ने से 1128 लोगाें को मलेरिया होने की पुष्टि हो चुकी है। इसमें 26 दिमागी मलेरिया के मामले सामने आए हैं। बीते दिनों डेंगू व संदिग्ध डेंगू के आठ व मलेरिया के दो रोगियों की मौत हो चुकी है।

वीरवार को आई डेंगू के मरीजों की रिपोर्ट में 7 लोगों को डेंगू होने की पुष्ठि हुई थी। वीरवार को 38 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इसके साथ अब तक जिले में डेंगू के 61 केस पॉजिटिव पाए गए हैं। 272 रोगियों के डेंगू के सैंपल लिए गए थे। चालू सप्ताह पर नजर डालें तो इस सप्ताह में डेंगू के सात व मलेरिया के 17 केस सामने आए हैं।

डेंगू व मलेरिया के अधिकतर रोगी शहर के निजी अस्पतालों से अपनी उपचार ले रहे हैं। सिविल सर्जन डॉ. वंदना भाटिया ने बताया कि जिले में अब तक केवल एक ही मौत डेंगू पीड़ित की हुई है। मरने वाले बाकी सभी लोग संदिग्ध डेंगू पीड़ित थे। अब तक 272 बीमार लोगों के डेंगू की जांच के लिए सैंपल लिए जा चुके हैं, जिसमें 61 केसों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। 38 रोगियों के सैंपल लेने के बाद यमुनानगर में जांच के लिए भेजे गए है। उनकी रिपोर्ट आनी बाकी है। 
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