संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जनस्वास्थ्य विभाग व नगर निगम शहरवासियों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है। अप्रैल माह में शहर की जलापूर्ति स्काॅडा के आधार पर होगी। इसके लिए नगर निगम ने करीब 175 पेयजल ट्यूबवेलों में से 141 को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) के साथ जोड़ दिया है। अन्य 34 ट्यूबवेलों को स्काडा परियोजना से चलाने का काम किया जा रहा है।
अप्रैल माह में इन ट्यूबवेलों पर स्काॅडा यंत्र लगवा दिए जाएंगे। स्काडा यंत्र लगने के बाद शहर भर में नगर निगम के अधीन आने वाले सभी ट्यूबवेलों से पेयजल आपूर्ति बेहतर हो जाएगी। पाइपलाइन लीकेज व लो प्रेशर की समस्या का भी समाधान होगा।
पिछले वर्ष शहर के जनकपुरी, शिव कॉलोनी, कर्ण विहार, न्यू चार चमन और दुर्गा कॉलोनी में पेयजल की गंभीर समस्या हो गई थी। इसे देखते हुए यह कदम उठाया गया है। मुख्य शहर से लेकर आउटर व लाइनपार की कॉलोनियों तक सभी जगह पानी की आपूर्ति एक साथ शुरू और बंद होगी।
पुराने शहर में लो प्रेशर की समस्या रहती है। इस क्षेत्र में 30 हजार से अधिक आबादी इस समस्या से जूझ रही है। इसके अलावा शहर में जगह-जगह पानी लीकेज की समस्या भी आड़े आती रहती है। खासकर सदर बाजार, इंद्रा कॉलोनी, रामनगर, प्रेम नगर सहित उन क्षेत्रों में, जहां पर लाइनें अधिक पुरानी हैं। यहां की समस्या का समाधान सबसे पहले किया जाएगा। स्काॅडा आधारित पेयजल आपूर्ति होने पर फायदा यह होगा कि सभी ट्यूबवेल ऑटोमेशन मोड में आ जाएंगे, ये ऑटोमेटिक चलेंगे और बंद होंगे। इससे पानी देर से आने और जल्द चले जाने जैसी शिकायतें नहीं आएंगी। शहर में करीब 26 पेयजल ट्यूबवेलों के लिए बिल्डिंग निर्माण कार्य चल रहा है जो मार्च के अंत तक पूरा हो जाएगा। स्काॅडा आधारित प्रणाली से 175 ट्यूबवेलों से पेयजल आपूर्ति की जाएगी। यह सभी ट्यूबवेल आईसीसीसी से कनेक्ट हो जाएंगे। सभी की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की रिपोर्ट सीधे अधिकारियों तक पहुंचेगी, जिससे पेयजल आपूर्ति सुचारू बनी रहेगी। लीकेज या लो प्रेशर की समस्या है तो उसका तुरंत पता चल जाएगा। सभी पेयजल ट्यूबवेलों पर लगाए जा रहे यंत्रों के जरिये पानी की पीएच वेल्यू भी ऑनलाइन पता चल जाएगी। आईसीसीसी में यह डाटा संग्रहित हो जाएगा कि कौन से ट्यूबवेलों से सप्लाई होने वाले पानी का पीएच कितना है। पीएच यानी पोटेंशियल ऑफ हाइड्रोजन, जिससे यह पता चलता है कि पानी कितना अम्लीय और कितना क्षारीय है। पानी में क्लोरीन भी समान मात्रा में होगा। स्काडा सिस्टम ऐसे करेगा काम ः डिजिटल नेटवर्क और कंप्यूटर सिस्टम के स्काॅडा यंत्र वास्तविक समय के डाटा को इकट्ठा करते हैं और उसका विश्लेषण करके रिपोर्ट तैयार करते हैं। इससे पता चलेगा कि ट्यूबवेल से पानी पूरा जा रहा है, यदि जा रहा है तो आगे क्यों नहीं पहुंच रहा है। इसके बारे में प्रेशर ट्रांसमीटर इंडीकेट करेंगे कि किस स्थान पर पानी का फ्लो कम चल रहा है। इससे इंजीनियरों को पता चल जाएगा।