संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले में दो बड़े अस्पताल हैं लेकिन कहीं भी यूरोलॉजिस्ट नहीं है। जबकि ठंड में पत्थरी के मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है जिसके चलते अस्पतालों में रोजाना गुर्दे की पथरी के ऑपरेशन कराने के लिए मरीज नागरिक अस्पताल और कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में जा रहे हैं लेकिन दोनों ही जगह यूरोलॉजिस्ट की पोस्ट ही नहीं है इस कारण निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराने को मजबूर हैं।
दोनों बड़े अस्पतालों में पित्त की पथरी के ऑपरेशन तो हो रहे हैं लेकिन गुर्दे की पथरी के मरीजों को जांच कराने के बाद लौटना पड़ रहा है क्योंकि यहां गुर्दे की सर्जरी के लिए यूरोलोजिस्ट का पद ही नहीं है। दोनों अस्पतालों में रोजाना करीब 10 मरीजों में से चार से पांच गुर्दे की पथरी के ऑपरेशन के लिए आ रहे हैं लेकिन दवाओं का उपचार लेकर लौट रहे हैं। वहीं, सर्दियों में पानी कम पीने, पसीना कम निकलने और तरल पदार्थ की कमी से गुर्दे की पथरी बनने या पहले से मौजूद स्टोन में दर्द बढ़ रहा है। लेकिन मरीज ऑपरेशन नहीं करा पा रहे। 2017 से स्थापित मेडिकल कॉलेज और 1996 से स्थापित जिला नागरिक अस्पताल में अब तक यूरोलॉजिस्ट का एक पद नहीं है जिस कारण मरीजों का निजी अस्पतालों से इलाज कराना पड़ रहा है।
ऑपरेशन बाहर से कराने को मजबूर
दोनों बड़े अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए पहुंच रहे हैं। फिर चिकित्सक के पास पहुंचते हैं लेकिन ऑपरेशन नहीं करा पाते क्योंकि अन्य जांच के बाद डॉक्टर दवा से ही उपचार लेने की सलाह दे रहे हैं। मरीजों का कहना है कि दर्द के कारण रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है, इसलिए वे निजी अस्पतालों में ऑपरेशन कराने की तैयारी कर रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में यूरोलोजिस्ट की पोस्ट नहीं है। आने वाले समय में कुटेल मेडिकल यूनिवर्सिटी में नए डॉक्टरों और यूरोलॉजिस्ट समेत कई स्पेशलिस्ट की भर्ती होने की उम्मीद है।
- डॉ. दीपक गोयल, प्रवक्ता, जिला नागरिक अस्पताल
मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा नहीं है। शुरू से ही यूरोलॉजी विभाग और यूरोलॉजिस्ट की पोस्ट सैंक्शन नहीं है। कुटेल मेडिकल यूनिवर्सिटी में सुविधा शुरू हो सकती है।
- डॉ. निवेश अग्रवाल, मेडिकल सुप्रीटेंडेंट, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज