कैथल में करीब एक साल पहले शुरू हुई शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाने की मुहीम अभी तक सरकारी दफ्तरों की फाइलों में ही अटकी हुई है।
प्रशासन न जाने किस इंतजार में है, जबकि पुलिस की ओर से शहर के मुख्य स्थानों का सर्वे करके प्रशासन को सूची सौंप दी गई है। लेकिन अभी तक कैमरे लगवाए जाने की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। यदि शहर के मुख्य चौक पर सीसीटीवी कैमरे होते तो शायद बुधवार को शहर में हुई 44 लाख रुपये की लूट के के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग पुलिस के हाथों लग गया होता।
एक साल पहले सीसीटीवी लगाने की प्लानिंग
करीब एक साल पहले पुलिस ने एक मीटिंग कर अपराधिक घटनाओं पर रोकथाम के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाने की प्लानिंग शुरू हुई थी। इसके बाद से यह प्लानिंग ही चल रही है। शहर के किसी भी बड़े या छोटे चौक पर कैमरा नहीं लग पाया है। जिसका फायदा असामाजिक तत्वोें को मिल रहा है।
स्थान किए जा चुके हैं चिह्नित
शहर में पुलिस एवं नगर परिषद की ओर से सर्वे करके करीब दर्जन भर से अधिक स्थानों का सर्वे करके आवश्यकता अनुसार कैमरे लगवाए जाने की जगह चिह्नित की जा चुकी है, जिसकी सूची भी जिला प्रशासन को दी गई है। लेकिन अभी बात कागजों तक ही सिमटी हुई है। शहर में नवग्रह-पिहोवा चौक, ढांड रोड, जींद रोड बाईपास, अंबाला रोड बाईपास, चंदाना गेट, भगत सिंह चौक सहित मुख्य चौक-चौराहों पर ये कैमरे लगवाए जाने हैं।
सांसद जिंदल दे चुके हैं राशि
शहर में लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सांसद नवीन जिंदल की ओर से 10 लाख रुपये की ग्रांट भी दी जा चुकी है। बावजूद इसके अभी तक जिला प्रशासन सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवा पाया है।
कैमरों से मिलती है मदद
एसपी कुलदीप सिंह यादव का कहना है कि पुलिस ने जगह चिह्नित करते हुए एडीसी कार्यालय को सूची भेज दी थी। इसके लिए प्रशासन की ओर से कार्य किया जा रहा है। चौक पर कैमरे लगे होते तो निश्चित रूप ये जांच में मदद मिलती है।
कैमरों के लिए कमेटी गठित
डीसी एन के सोलंकी का कहना है कि माननीय सांसद नवीन जिंदल की ओर से राशि सीसीटीवी कैमरों के लिए 10 लाख रुपये की ग्रांट मंजूर की गई है। सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाने के लिए एडीसी, डीएसपी, डीआईओ की एक कमेटी का गठन किया गया है। जो कैमरों की गुणवत्ता की जांच कर रही है। शीघ्र ही कैमरे लगवाए जाने की प्रक्रिया को पूरी की जाएगी। मंगलवार को भी समिति की बैठक हुई थी।