करनाल।
जिले में इस सीजन में कुल 4.25 लाख एकड़ में धान की खेती की गई थी। कटाई अब पूरी हो चुकी है। पिछले साल पराली जलाने के 84 मामलों के सापेक्ष इस साल सिर्फ 13 मामले सामने आए हैं। मामलों में 85 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। 15 किसानों पर एफआईआर दर्ज कराकर मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर उनके रिकॉर्ड में रेड एंट्री कर दी गई है, जिससे ये किसान अब आगामी दो सीजन में अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पाएंगे।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि इस वर्ष करनाल जिले में धान की फसल 4,25,000 एकड़ में रोपित की गई थी, जिसकी कटाई लगभग खत्म हो चुकी है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल पराली जलाने के मामलो में 85 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। सेटेलाइट के माध्यम से अभी तक पराली जलाने के कुल 13 मामले सामने आए हैं, जबकि पिछले वर्ष इनकी संख्या 84 थी। पराली जलाने के सात मामले ग्राम स्तरीय प्रवर्तन टीमों ने पकड़े हैं। इन सभी मामलों पर 15 किसानों के खिलाफ संबंधित थानों में एफआईआर लिखाई गई है। इन पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, साथ ही पोर्टल रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई।
कड़ी निगरानी से कम हुई घटनाएं
उन्होंने बताया कि निगरानी के लिए गठित टीमों ने पराली जलाने की अच्छी निगरानी की, जिसके कारण पराली जलाने के मामले घटे हैं। इन टीमों में लगभग 750 अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाईं गई थी। फसल अवशेष में आग न लगाने और फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया गया। प्रत्येक खंड में कई बार फ्लैग मार्च निकाले गए। जिला व खंड स्तर पर आगजनी की घटनाओं से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए। इस वर्ष सभी कंबाइन हार्वेस्टर के मालिको को धान की कटाई करते समय सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम लगाने के लिए नोटिस दिए गए।