करनाल।
जिला नागरिक अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में एक एक्सरे मशीन खराब है। मशीन के अधिकांश एक्सरे धुंधले आते हैं। गुणवत्ता सही नहीं होने पर मरीज शिकायत करते हैं। विभाग में एक और एक्सरे मशीन है लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने से पुरानी मशीन को भी प्रयोग करना पड़ता है। चिकित्सकों का कहना है कि उन्होंने इस बारे में विभाग को अवगत करा दिया है।
मशीन 16 साल पुरानी हो चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार एक्स-रे मशीन की अधिकतम उपयोग अवधि 10 से 12 साल ही होनी चाहिए। इसके बाद न केवल एक्स-रे की गुणवत्ता घट जाती है बल्कि मरीजों और स्टाफ के लिए विकिरण (रेडिएशन) का खतरा भी बढ़ जाता है। नागरिक अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट रविंद्र के अनुसार एक्सरे का अधिकांश काम वर्ष 2021 में लाई गई दूसरी एक्स-रे मशीन से ही होता है। पुरानी एक्स-रे मशीन से धुंधले और अस्पष्ट चित्र आते हैं, जिससे डॉक्टरों को सटीक निदान में दिक्कत होती है। कभी-कभी ही इसका प्रयोग किया जाता है।
कंपनी ने मरम्मत से किया इन्कार
कंडम एक्स-रे मशीन जीई कंपनी से आई है। मशीन इतनी पुरानी हो चुकी है कि कंपनी ने इसके वार्षिक रखरखाव अनुबंध से इन्कार कर दिया है। मशीन की कीमत करीब 10 लाख रुपये है। 2021 में लाई गई दूसरी मशीन जीएमई कंपनी की है। इसकी कीमत भी 10 लाख के करीब ही है।
रोजाना करीब 150 मरीजों के एक्स-रे
अस्पताल में हर दिन औसतन 150 मरीज एक्स-रे कराने के लिए पहुंचते हैं। इनमें सामान्य चोटों से लेकर हड्डी टूटने, सीने, गले और पेट संबंधी रोगों की जांच के लिए आने वाले मरीज शामिल हैं। एक ही मशीन पर इतने मरीजों का भार होने के कारण रिपोर्ट तैयार होने में देरी हो रही है। कई मरीजों को रिपोर्ट के लिए अगले दिन तक इंतजार करना पड़ता है।
पुरानी एक्स-रे मशीन जिस क्षमता से काम करती थी अब उस तरह से काम नहीं कर रही है। जिस पावर से इसका एक्सपोजर जाता था अब वह नहीं हो पाता है और कमजोर पड़ चुका है। एएमसी और सीएमसी निजी टेंडर से करा कर काम चला रहे हैं जब तक कोई दूसरी मशीन नहीं आ रही। पिछले डेढ़ या दो पहले पीएमओ डॉ. बलवान सिंह के माध्यम से पुरानी मशीन के स्थान पर नई मशीन लगवाने का प्रस्ताव डीजीएचएस को भेजा जा चुका है। हालांकि अब तक इस बारे में कुछ किया नहीं गया है। - प्रधान व रेडियोलोजिस्ट रविंद्र, हरियाणा रेडियोलॉजिस्ट अधिकारी एसोसिएशन, जिला नागरिक अस्पताल