शहर और आसपास के क्षेत्रों में शनिवार की सुबह से बादल छाए रहे, वहीं दोपहर बाद झमाझम बारिश से मौसम सुहावना हो गया। लगभग एक घंटे में करीब नौ एमएम बारिश रिकार्ड की गई। विदित हो कि मौसम विभाग की ओर से पूर्व में ही बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई गई थी।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग चंडीगढ़ का पूर्वानुमान है रविवार को भी दिनभर बादलों की आंख मिचौली जारी रहेगी। सोमवार को गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी की संभावना है। इसके बाद 18 से 21 मई तक तक बादल छाने या बूंदाबांदी की संभावना बनी रहेगी।
केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के मौसम विभाग के अनुसार शनिवार दोपहर 9.0 एमएम वर्षा दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 36.4 व न्यूनतम 22.8 डिग्री सेल्सियस रहा। नमी सुबह 67 व दोपहर को 86 प्रतिशत रही। वाष्प दाब 17.4 एमएम रहा। हवा की औसत गति सुबह 0.7 और दोपहर को 2.2 किलोमीटर प्रति घंटा रही। एक दिन पूर्व शुक्रवार को अधिकतम तापमान 34.4 व न्यूनतम 19.8 डिग्री सेल्सियस था। वहीं पिछले साल 15 मई को अधिकतम तापमान 38.0 व न्यूनतम 21.8 डिग्री सेल्सियस था।
यमुना बेल्ट के गांवों में ओलावृष्टि
शनिवार को हुई झमाझम बारिश के दौरान यमुना बेल्ट के नवीपुर, चुंडीपुर, टापू सहित कई अन्य गांवों में ओलावृष्टि भी हुई। इससे फसलों के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
किसानों के लिए फायदेमंद
किसानों के लिए यह वर्षा बहुत फायदेमंद रहेगी। सूखे खेतों की जुताई के लिए सिंचाई करनी पड़ रही थी। वहीं गन्ना, चारा व सब्जी की फसलों को भी इससे फायदा होगा। ज्यादा बारिश से बेल वाली फसलों को नुकसान की संभावना रहती है, हालांकि अभी तक हुई वर्षा को अत्याधिक नहीं माना जा रहा।
बच्चों ने लिया बारिश का मजा
लॉकडाउन के चलते घरों में रह रहे बच्चों ने छतों पर चढ़कर फुहारों का आनंद लिया। वहीं लोगों ने बारिश के बीच चाय-पकौड़े का भी आनंद लिया। दूसरी ओर शहर की कुछ सड़कों पर जलभराव हुआ, जिस कारण दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्री-मानसून व मानसून का अभी इंतजार
करनाल। ऋतु चक्र के अनुसार जून के अंत तक प्री-मानसून व जुलाई की शुरुआत में करनाल क्षेत्र में मानसून सक्रिय होता है। केरल में जब मानसून शुरू हो जाता है तो उसके यहां पहुंचने से पूर्व उत्तर भारत क्षेत्र में वर्षा होती है, उसे प्री-मानसून मानते हैं। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अबकी बार मानसून की अच्छी दस्तक हो सकती है। मध्य जून से धान की रोपाई का सीजन जोर पकड़ने लगता है। उस समय बारिश होने पर ही लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।