करनाल। नई पीढ़ी को डॉक्टर मंगलसेन, अंतरिक्ष परी कल्पना चावला, भगवान परशुराम और वीरांगना अवंतीबाई के इतिहास और व्यक्तित्व से अवगत कराने के लिए इनकी प्रतिमाओं को शहर में स्थापित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना करीब एक साल पूर्व बनी थी। योजना के तहत विभिन्न चौराहों और संस्थानों में प्रतिमा स्थापित भी कर दी गई हैं। लेकिन अब लाखों रुपये से तैयार ये प्रतिमाएं महीनों से अनावरण की बाट जोह रही हैं।
अफसोस है कि माननीयों के पास इन प्रतिमाओं के अनावरण के लिए समय नहीं निकल पा रहा है। जिस वजह से ये तमाम प्रतिमाएं कपड़े व पॉलीथिन की पैकिंग में ही ढकी हैं। इन पर भी धूल की मोटी परत जम चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही इनके अनावरण के लिए समय मिल जाएगा तो औपचारिक कार्यक्रम के तहत इनका लोकार्पण कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री रहते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने इन प्रतिमाओं की स्थापना के लिए घोषणा की थी। जिस पर कार्य करते हुए इन प्रतिमाओं को तैयार कराकर अधिकारियों ने स्थापित भी करा दिया। मार्च माह से चबूतरों पर खड़ी इन प्रतिमाओं को लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए लगी आचार संहिता अनावरण में रोड़ा बनी। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने इसकी ओर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में अब धूल की जमी मोटी परत भी शहर के लोगों को शर्मसार कर रही है।
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जयपुर में बनी थी भगवान परशुराम की प्रतिमा
कर्ण कैनाल पार्क में भगवान परशुराम की प्रतिमा की स्थापना की घोषणा 22 दिसंबर 2022 में मुख्यमंत्री रहते हुए मनोहर लाल ने भगवान परशुराम महाकुंभ में की थी। पार्क में करीब 10 फुट ऊंचे चबूतरे पर 11 फुट की प्रतिमा स्थापित है। करीब 26.63 लाख से जयपुर में बनी प्रतिमा का अनावरण रामनवमी के दिन करने की योजना थी, लेकिन अभी तक इसका अनावरण नहीं हो पाया है।
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कल्पना चावला के नाम पर बने संस्थान की पहचान
कल्पना चावला की प्रतिमा की स्थापना की घोषणा मुख्यमंत्री रहते हुए मनोहर लाल ने इसी वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में की थी। करीब 40 लाख रुपये की लागत से यह 22 फुट ऊंची प्रतिमा भी आठ माह से अनावरण के इंतजार में है। करनाल की बेटी कल्पना चावला के नाम से बने एकमात्र संस्थान कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज में उनकी जिले में पहली प्रतिमा स्थापित हुई है। ताकि कल्पना के नाम से बने संस्थान में आने वाले लोग उनके जीवन से परिचित हो सकें। लेकिन पॉलीथिन में ढकी प्रतिमा पर धूल जमी है।
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सभागार में प्रवेश के सामने डॉ. मंगलसेन की प्रतिमा
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ही पूर्व सीएम मनोहर लाल ने डॉ. मंगलसेन सभागार में उनकी प्रतिमा लगाने की घोषणा की थी। करीब 40 लाख रुपये की लागत से यह 18 फुट ऊंची प्रतिमा मार्च माह से स्थापित है और अनावरण के इंतजार में है। 1927 में जन्मे डॉ. मंगल सेन 1977 से 1979 तक हरियाणा के उपमुख्यमंत्री भी रहे। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे लगातार सात बार रोहतक से विधायक चुने जाने के बाद भी विलासिता से कोसों दूर रहे। निधन तक डॉ. मंगलसेन के पास कोई संपत्ति नहीं थी।
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भारत की पहली महिला वीरांगना अवंती बाई भरेंगी जोश
सदर बाजार में कर्ण ताल पार्क के नजदीक चौराहे को वीरांगना अवंतीबाई लोधी चौक का नाम देते हुए यहां वीरांगना की करीब 22 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। करीब दो माह पहले से खड़ी इस प्रतिमा को भी अनावरण का इंतजार है। वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी भारत की पहली महिला शहीद वीरांगना थीं। वे 1857 के भारतीय विद्रोह में अहम भूमिका निभाने वाली थीं। उनका जन्म 16 अगस्त, 1831 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के मनकेहणी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम राव जुझार सिंह और माता का नाम कृष्णा बाई था। वे मध्य प्रदेश के रामगढ़ (वर्तमान डिंडोरी) की रानी थीं।
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वर्जन
मुख्यमंत्री से बात करके लेंगे समय : विधायक
यह मामला मेरे संज्ञान में आ गया है। करनाल में आने पर मुख्यमंत्री नायब सैनी के समक्ष इस विषय को रखा जाएगा। जिला अधिकारियों से भी प्रतिमाओं का अनावरण न होने संबंधित जवाब मांगा जाएगा। जल्द प्रतिमाओं का लोकार्पण कराने का कार्यक्रम आयोजित होगा।
- जगमोहन आनंद, विधायक करनाल