संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। श्री हनुमान सेवा समिति की ओर से मां अन्नपूर्णा धाम में आयोजित कार्यक्रम में प्रवचन करते हुए महामंडलेश्वर वेदांताचार्य स्वामी प्रणवानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि शास्त्रों में निहित ज्ञान मानव जीवन को मर्यादित, संयमित और सदाचार की ओर ले जाने वाला है। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन के अनुसार प्रकृति के तीन मूल गुण माने गए हैं, सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण।
इन्हीं तीनों गुणों के प्रभाव से मानव का स्वभाव, विचार, कर्म और जीवन की दिशा तय होती है। सत्त्वगुण को शुद्धता, ज्ञान और प्रकाश का गुण माना गया है। यह गुण मनुष्य में सद्बुद्धि, शांति, संयम, करुणा और विवेक को जागृत करता है। रजोगुण को कर्म, इच्छा और सक्रियता का गुण कहा गया है। यह गुण मनुष्य को कार्य करने, आगे बढ़ने और उपलब्धियां प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। तमोगुण अज्ञान, आलस्य और जड़ता का प्रतीक माना गया है। इस गुण से मन में नकारात्मकता, अविवेक और अज्ञान का अंधकार बढ़ता है। इस अवसर पर साधु राम सिंगला, बालकिशन त्रिपाठी, अमन शर्मा, वेद सलूजा, विपिन छाबड़ा, प्रदीप गर्ग, प्रवीन गर्ग, नरेश अरोड़ा, विनोद कुमार गोयल आदि मौजूद रहे। संवाद