संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से शिव चित्रगुप्त मंदिर में आयोजित सत्संग में प्रवचन करते हुए साध्वी यशोदा भारती ने कहा कि निःसंदेह भारत के मूल में वही सनातन पुरातन सर्वोच्च ज्ञान ब्रह्मज्ञान समाया हुआ है। अपना उपनिषदीय इतिहास पलट कर देखें, उसमें एक ऋषिकुमार नचिकेता ईश्वर के संबंध में इतनी बड़ी जिज्ञासा करने का साहस करते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे ऋषियों ने गोष्ठियां करके आचार, विचार, व्यवहार और नियम आदि बनाए और उन्हें भारतीय संस्कृति का रूप दे दिया। जहां तक विज्ञान की बात है, ग्रथों में कहा गया जो ब्रह्मांड में है, वहीं इस पिंड में समाया है। हमारे कपाल स्थल में सूक्ष्म रूप से एक ऐसी माइक्रोचिप है, जहां पर समस्त ब्रह्मांड अपने समूचे रहस्यों व शोभाओं के साथ समाया हुआ है। ब्रह्मज्ञान की साधना के द्वारा हमारे ऋषियों ने इसी माइक्रोचिप पर अन्वेषण किया | अंतस के ब्रह्मांड में झांका | यही कारण था कि ब्रह्मांड के गुप्त से गुप्त वैज्ञानिक रहस्य उनके लिए स्वतः ही उद्घाटित होते चले गए।