संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। छठ महापर्व के दूसरे दिन जिलाभर में श्रद्धालुओं ने खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू किया। घर-घर में महिलाओं ने खरना में रोटी व खीर का प्रसाद बनाया। उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करने के बाद इसे घर व आस-पड़ोस के लोगों को बांटा। कई घरों में परिवार की महिलाओं ने मिलकर छठ मइया के गीत गाए। इनमें, उगा हो सुरुजदेव भिन भिनसरवा, अरघ केर-बेरवा, पूजन केर-बेरवा हो... जैसे प्रचलित गीत शामिल हैं।
तीसरे दिन सोमवार को उपवास रखने वाले श्रद्धालु परिवार सहित संध्याकाल में विभिन्न घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। कई जगह लगे बाजार में चहल-पहल से रौनक बनी हुई है। श्रद्धालु छठ मइया की पूजा के लिए दिनभर पूजन सामग्री की खरीदारी में व्यस्त हैं। महिलाओं ने कहा कि उनके लिए छठ का यह उपवास कठिन तपस्या नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा उत्सव है।
महिलाओं ने मिलकर गाया गीत
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कोमल तिवारी ने बताया कि उनके घर में छठ पर्व के पहले दिन से पूरा मोहल्ला मिलकर शाम के समय छठ के गीत गाता है। व्रत रखने वाली महिलाओं में अन्य दिनों के मुकाबले अलग ऊर्जा होती है जिसमें वह इस कठिन व्रत को बिना किसी रुकावट के करती हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार से लगातार छठ मैया व सूर्य देव के गीत गाए जा रहे हैं।
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गीतों में छिपी है श्रद्धालुओं की आस्था
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सरोज देवी ने बताया कि उन्होंने गीत, शीतल बयरिया शीतल दूजे पनिया कब देव देवता तू आके दर्शनिया... गाया। इस गीत में श्रद्धालुओं के भाव छिपे हुए हैं जो श्रद्धालु गाकर प्रकट करते हैं। गीतों के माध्यम से छठ मैया को बुलाया जाता है, सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। ऐसे ही गीतों से पर्व को और अधिक भक्तिमय बनाया जाता है।
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घरों में भक्तिमय हुआ माहौल
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सीमा रानी ने बताया कि छठ गीत जीवन का सबसे पवित्र हिस्सा होते हैं। उन्होंने सुबह कोसिया डाल पर उगले सूरज देव.... गीत गाया। इसे गाकर शांति महसूस होती है और भूख प्यास भी नहीं लगती। उन्होंने बताया कि पूरा परिवार मिलकर छठ पर्व को मनाता है जिसमें सभी तैयारियां करना और शाम के समय गीतों को गाना पर्व की शोभा बढ़ाता है। वहीं जरूरी भी है कि आने वाली पीढ़ी को गीतों के माध्यम से छठ की महत्ता बताई जाए।
व्रत धारण करने में नहीं कठिनाई
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शोभा ने बताया कि उन्होंने सुबह उठकर छठी मैया के गीत गाए। उन्होने कहा कि 36 घंटे निर्जला व्रत रखना एक तरह से मुश्किल लगता है लेकिन जब इसे धारण किया जाता है तो किसी भी प्रकार से यह कठिन नहीं लगता बल्कि व्रत करने में खुशी का एहसास होता है। उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम तक उनके घर में छठ के गीतों को गाया जाएगा।