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Karnal News: मौसम में बदलाव और प्रदूषण से बढ़े खांसी और जुकाम के मरीज

Mon, 27 Oct 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। हवा में मौजूद धूल, धुआं और बदलते तापमान का असर अब स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। अस्थमा के मरीजों के साथ अब खांसी, जुकाम और सांस से जुड़ी समस्या तेजी से बढ़ी है। जिला नागरिक अस्पताल की जनरल मेडिसिन, सांस रोग और फ्लू ओपीडी में इन दिनों रोजाना 70 से 80 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर बुजुर्ग और बच्चे हैं, जिन्हें लगातार खांसी और साथ में गले में खराश, जुकाम और सांस लेने में परेशानी की शिकायत है।
बीते हफ्ते में जनरल, सांस रोग और फ्लू ओपीडी में मरीजों की संख्या में करीब 30 से 40 फीसदी तक वृद्धि दर्ज की गई है। चिकित्सकों का कहना है कि अगर प्रदूषण का स्तर इसी तरह रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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जिला नागरिक अस्पताल से वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलबीर ने बताया कि मौसम में बदलाव के दौरान हवा में नमी और प्रदूषण दोनों बढ़ जाते हैं, जिससे श्वसन तंत्र प्रभावित होता है। वहीं, जब हम ऐसे में सांस लेते हैं तो वे कण श्वास नली के जरिये शरीर में प्रवेश करते हैं और लंबे समय तक घर कर जाते हैं। यह एक सप्ताह के लिए भी हो सकता है और एक महीने भी। क्योंकि इस मौसम में नमी अधिक है जिस कारण ये धूल और धुएं के महीन कण फेफड़ों और गले में सूजन पैदा करते हैं, जिससे खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। खासतौर पर अस्थमा और एलर्जी वाले मरीजों पर तो इसका असर हो ही रहा है बल्कि आम लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय लोगों को सुबह और शाम के समय पार्कों या सड़क पर टहलने से बचना चाहिए, क्योंकि इसी वक्त हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है।

समय पर जांच और इलाज जरूरी
सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप का कहना है कि इस समय खांसी-जुकाम वायरल संक्रमण का रूप ले रहा है। यह मौसम इस बीमारी का पीक समय है जब ऐसे मरीजों की तादाद बढ़ जाती है। ऐसे में समय पर जांच और इलाज बेहद जरूरी है। कई मरीज पांच से सात दिन तक लगातार खांसी की समस्या झेल रहे हैं, जो सामान्य मौसमी बदलाव का परिणाम है लेकिन लापरवाही से यह ब्रोंकाइटिस या अस्थमा अटैक में बदल सकती है अगर इसका समय रहते उपचार न किया जाए।
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समय पर इलाज न हो तो उम्र भर रह सकती है खांसी
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलबीर ने बताया कि इस मौसम में सावधानी बरतना जरूरी है। क्योंकि अगर समय रहते खांसी को ठीक न किया जाए तो यह उम्र भर के लिए भी रह सकती है। उन्होंने कहा कि लोग घर से बाहर निकलते समय नाक और मुंह को कपड़े या मास्क से ढकें, दिन में पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीएं और ठंडे पेय पदार्थों से पूरी तरह बचें। सुबह उठते ही ठंडी हवा में टहलना या नहाना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। अस्थमा रोगी और खासतौर पर बच्चे व बुजुर्ग लंबे सफर पर न निकलें। जिन लोगों को अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या पुरानी खांसी की समस्या है, उन्हें इन दिनों अपनी दवा नियमित लेनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा बंद नहीं करनी चाहिए। भोजन में मौसमी फल-सब्जियां शामिल करें ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे।

ये उपाय करें-
- अस्थमा मरीज इनहेलर अपने पास रखें।

- वायरल के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।
- ठंडा पानी या बर्फ वाले पेय पदार्थों से परहेज करें।

- सुबह-शाम बाहर निकलते समय नाक-मुंह ढकें।
- घरों में धूल जमने से रोकें, एसी का उपयोग न करें।
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