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आदर्श जीवन जीना सिखाती है प्रभु श्री राम की कथा

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करनाल। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से हुडा ग्राउंड सेक्टर 13 में श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आशुतोष महाराज की शिष्य रूपेश्वरी भारती ने श्रद्धालुओं को राम कथा श्रवण का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि प्रभु की कथा जहां हमें ईश्वर भक्ति की ओर बढ़ने का संदेश देती है वही आदर्श जीवन जीना भी सिखाती है। प्रभु श्री राम ने माता पिता की आज्ञा पाकर सहर्ष ही 14 वर्ष का वनवास स्वीकार कर लिया।
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साध्वी जी ने कहा कि समाज में फैली बुराइयों का मुख्य कारण मानव का मन है। कोई भी बुराई पहले मनुष्य के मन में उत्पन्न होती है। यदि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है तो मानव के भीतर विकृत मन को सुधारना होगा। यह मात्र केवल ईश्वरीय ज्ञान से ही संभव है। उन्होंने कहा कि माता शबरी की कुटिया में प्रभु श्री राम स्वयं गए और उनके हाथों से जूठे बेर खाये। प्रभु किसी की जाती पाति नहीं देखते, वह मात्र केवल भक्तों के दिल का भाव और प्रेम देखते हैं। ये निष्काम प्रेम ,भाव और श्रद्धा ईश्वर को जान लेने के पश्चात ही मानव के मन में उत्पन्न होती है।
साध्वी जी ने कहा कि देश का युवा समाज की रीढ़ की हड्डी होता है लेकिन सही दिशा ना मिल पाने के कारण वह पथ भ्रष्ट हो गया है। युवा में वायु सा वेग और उत्साह होता है। जब यह युवा शक्ति पथ भ्रष्ट हो जाती है तो गलत कार्यों में लिप्त हो जाती है। आज समाज के युवा को सही दिशा देने की आवश्यकता है ताकि यह युवा शक्ति समाज और राष्ट्र के उत्थान में लग सके। यदि युवा शक्ति को सही दिशा में लगाना है तो उन्हें आध्यात्मिक धारा से जोड़ना ही होगा। क्योंकि अध्यात्म हमें जीवन में अनुशासन देता है । रावण के आतंक को खत्म करने के लिए प्रभु श्री राम ने युवावस्था में ही संकल्प लिया था। इतिहास इस बात का गवाह है कि जब जब समाज में परिवर्तन आया तो उसमें युवाओं का मुख्य योगदान रहा। कथा में साध्वी बहनों ने भजनों की प्रस्तुति भी दी।
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