पिहोवा। अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव मंगलवार को सरस मेले के साथ संपन्न हुआ। दूर-दराज के विभिन्न राज्यों से पहुंचे शिल्पकार मेला संपन्न होते ही लौट गए। 29 जनवरी से सप्ताह भर तक महोत्सव के दौरान पवित्र सरस्वती तट जहां शिल्पकला के साथ-साथ संस्कृति व अध्यात्म का संगम बना रहा वहीं सरस मेले में आत्मनिर्भर भारत की झलक भी देखने को मिली।
सात दिन में यहां बड़ी संख्या में पहुंचे पर्यटक भी गदगद हो उठे तो वहीं महोत्सव के जरिए पिहोवा उपमंडल को भी नई पहचान मिली। एक-दूसरे को अगले साल फिर मिलने का भरोसा देते हुए शिल्पकार मंगलवार को अपने-अपने प्रदेश लौट गए। पहली बार महोत्सव का आयोजन सात दिन तक किया गया, जिस दौरान यहां वीआईपी आगमन से लेकर संत महापुरुष भी पहुंचे तो वहीं हरियाणा के साथ-साथ पंजाब व अन्य राज्यों से आए कलाकारों ने भी समां बांधे रखा।
महोत्सव के दौरान उस समय भक्तिमय माहौल रहने लगा जब पवित्र सरस्वती तट पर सांध्यकालीन आरती की जाने लगी। यहां केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविंद्र कल्याण, मुख्यमंत्री नायब सैनी की पत्नी एवं हरियाणा बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्ष सुमन सैनी, मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती सहित अनेक वीआईपी लोगों का आगमन रहा।
सजावटी व दैनिक उपयोग की वस्तुएं बनी रहीं आकर्षण का केंद्र
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव में आयोजित सरस मेले में हरियाणा सहित अन्य राज्यों के एसएचजी सदस्यों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प, हैंडलूम, जैविक उत्पाद, सजावटी वस्तुएं, और दैनिक उपयोग की वस्तुएं आकर्षण का केंद्र बनी रही। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने कहा कि यह मेला ग्रामीण हस्तशिल्प, संस्कृति और व्यंजनों का अद्भुत संगम बना रहा। इस सरस मेले में न केवल ग्रामीण उत्पादों को बढ़ावा दिया बल्कि पर्यटकों के लिए भी एक अनूठा अनुभव प्रदान किया है। इस मेले में हस्तशिल्प, हैंडलूम, जैविक उत्पाद, सजावटी वस्तुएं और दैनिक उपयोग की वस्तुएं विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
स्वयं सहायता समूहों को एक मंच प्रदान करना है मेले का उद्देश्य
इस मेले का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के स्वयं सहायता समूह को एक मंच प्रदान करना है, जहां ये अपने उत्पादों को प्रदर्शित कर सकें और व्यापक बाजार तक पहुंच बना सकें। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरस मेला सिर्फ खरीदारी के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति को जानने और समझने का भी एक सुनहरा अवसर होता है। ग्रामीण हस्तशिल्प और हैंडलूम उत्पाद, देशभर के बेहतरीन शिल्पकारी द्वारा तैयार उत्कृष्ट वस्तुएं, स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल हरियाणा, सांस्कृतिक कार्यक्रम हर दिन लोक नृत्य, संगीत और कला के शानदार प्रदर्शन, महिला उद्यमिता की झलक जो महिला सशक्तिकरण का उदाहरण हैं।
अब अगले साल होने वाले महोत्सव की तैयारी होंगी शुरू : धुम्मन
पिहोवा। समापन समारोह में सरस्वती हैरीटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव आने वाले समय में सरस्वती महोत्सव को और अधिक विस्तार के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक मनाने का यह पहला प्रयास सफल रहा। लोग दूर-दूर से सरस्वती तट पर मां सरस्वती का आशीर्वाद लेने के लिए महोत्सव में पंहुचे।
उन्होंने कहा कि अगले वर्ष इस महोत्सव को इससे भी अधिक बडे़ स्तर पर मनाया जाएगा तथा इस बार जो कुछ एक कमियां आई, उन्हें दुरूस्त किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 29 मार्च को लगने वाले चैत्र चौदस मेले की तैयारियां भी सरस्वती तीर्थ पर आरंभ कर दी जाएंगी। तीर्थ पर बाहर से आने वाले लोगों को कोई समस्या न हो, इसके भी इंतजाम पहले से ही कर दिए जांएगे। इस मौके पर डीएसपी निर्मल सिंह, तहसीलदार विनती, सिंचाई विभाग के एससी अरविंद कौशिक, नगर पालिका प्रधान आशीष चक्रपाणि उप प्रधान प्रतिनिधि सुरेंद्र ढींगरा, सरस्वती हेरिटेज बोर्ड सदस्य गुरविंदर सिंह मोरथली, खंड शिक्षा अधिकारी रामराज, सरस्वती हेरिटेज बोर्ड एक्ससीएन जसतेज सिंह सैनी सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।