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Karnal News: जिम्मेदार लापरवाह हैं, हाईवे पर संभलकर चलें

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नमस्‍ते चौक की ओर जाते हुए बने नाले की साइड में नहीं है रेलिंग। संवाद
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। नोएडा में एक इंजीनियर की मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद यूपी सरकार हरकत में आई। करनाल में नेशनल हाईवे-44 पर और शहर की सड़कों पर खुले नालों के हालात सुधारने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने सबक नहीं लिया। आप कोहरे में इन राहों से गुजर रहे हैं तो जरा संभलकर चलें। जिम्मेदार लापरवाह है तो अपनी सुरक्षा के लिए खुद ही एहतियात बरतें।
नेशनल हाईवे-44 की सर्विस लेन और एलिवेटेड हाईवे के बीच से निकलता नाला कभी भी हादसे का कारण बन सकता है। जरा सा भी ध्यान हटा तो गाड़ी नाले में गिर सकती है क्योंकि इस पर स्लैब ही नहीं है। हर 100 से 200 मीटर की दूरी में ऐसे कई प्वाइंट देखे जा सकते हैं, जहां नाला खुला है। या फिर स्लैब टूटकर गिरी हुई है। इसके अलावा ताऊ देवी लाल चौक के नजदीक से गुजरते मुगल कैनाल के पास तो पूरा नाला ही खुला है, जिसमें बड़ा वाहन भी आसानी से गिर सकता है।
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पिछले एक साल में हादसों का रिकार्ड देखें तो कई बार इस नाले के कारण हादसे हो चुके हैं और दूसरे दिन कहीं न कहीं गोवंश भी इनमें गिरता है। जिसे गोसेवा दल के लोग निकालने जाते हैं। इन हालात के बाद भी एनएचएआई की ओर से सबक नहीं लिया गया और नाले खुले हैं। हैरानी की बात यह भी है कि हर माह होने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उपायुक्त भी इन नालों को ढकने का निर्देश देते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदारों की ओर से काम नहीं किया गया। केवल उसी जगह की स्लैब को ढककर रिपोर्ट दे दी जाती है, जहां की स्थिति को एजेंडे में शामिल करते हुए उपायुक्त चर्चा करते हैं।
चालक की लापरवाही से दिन में भी होते हैं हादसे
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ तेजपाल और एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि दिन के समय में हाईवे से तेज रफ्तार से वाहन गुजरते हैं। यदि चालक का थोड़ा भी ध्यान भटका या लापरवाही हुई तो हादसा हो सकता है। इसके अलावा इन दिनों कोहरे में दृश्यता कम है। वाहन चालक सफेद पट्टी के सहारे आगे बढ़ते हैं। इसी पट्टी के साथ ही नाला खुला हुआ है। कोहरे या रात में जब चालक को आगे की स्थिति का पता नहीं चला और थोड़ा भी स्टेयरिंग घुमा दिया तो पहिया नाले में उतरते ही हादसा हो जाएगा। इन्हें दुरुस्त किया जाना चाहिए।
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वर्जन
नालों को कवर किया जा रहा है। ग्रैप-4 के कारण काम रोक दिया था। जो अभी भी खुले या स्लैब टूटी है, इन्हें भी शीघ्र दुरुस्त करा दिया जाएगा। - भानू प्रताप, सेक्शन इंजीनियर, एनएचएआई
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