- ग्लोबल इमिग्रेशन जस्टिस मंच ने नए विधेयक में बताई खामियां
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। विधानसभा में पारित ट्रैवल एजेंट पंजीकरण एवं विनियमन विधेयक में ट्रैवल एजेंट और इमिग्रेशन एजेंट की योग्यता तय नहीं की गई है। दोनों के कार्य क्षेत्र अलग-अलग हैं। ग्लोबल इमिग्रेशन जस्टिस मंच के संयोजक एवं कनाडा सरकार की ओर से पंजीकृत इमिग्रेशन सलाहकार डॉ. अरविंद कुमार कादियान का कहना है कि जिस तरह एक वकील को कानून की पढ़ाई और चिकित्सक को चिकित्सा का अध्ययन करना जरूरी है। इसी प्रकार इमिग्रेशन यानी वीजा सलाहकार के लिए इमिग्रेशन कानून की शिक्षा आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत के विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, वीजा एजेंटों को लाइसेंस देने के मानदंड संबंधित विदेश द्वारा तय किए जाते हैं, इसलिए वीजा सेवाओं का अभ्यास करने के लिए लाइसेंस देने में केंद्र सरकार या राज्य सरकार की भूमिका नहीं है। सरकार को अधिनियम बनाने का अधिकार है, लेकिन इमिग्रेशन कानून के ज्ञान और संबंधित विदेशी सरकार से प्रमाणन के बिना किसी को भी अभ्यास करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि भारत में ट्रैवल एजेंट, एजेंसियां या आईलेट्स कोचिंग केंद्र वीजा परामर्श सेवाएं प्रदान करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। लेकिन ये केंद्र ही अपनी एजेंसी की आड़ में अवैध काम कर रहे हैं। विदेश के लेबर आपूर्ति या यात्रा करने के लिए केंद्र सरकार ने लाइसेंस व्यवस्था लागू की। हरियाणा सरकार ने भी विधानसभा में विधेयक पेश किया लेकिन यह विधेयक भी इमिग्रेशन एजेंट और ट्रेवल एजेंट की परिभाषा तय नहीं कर पाया। ट्रेवल एजेंट टिकट या यात्रा प्रबंधन का काम तो कर सकते हैं लेकिन स्टडी, टूरिस्ट, वर्क वीजा, इमिग्रेशन का काम नहीं कर सकते। ब्यूरो