- बाजार में जयपुरी बंधेज, अमृतसरी फुलकारी, गुजरात के कॉटन दुपट्टे और अजरख प्रिंट की सबसे अधिक मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। बाजार में गर्मियों में पहने जाने वाले कपड़ों की बिक्री तेज हो गई है। इनमें स्कॉर्फ और सूती दुपट्टों की मांग तेजी से बढ़ रही है। महिला कर्मचारी हो या कॉलेज या कोचिंग जाने वाली युवतियां, गर्मी से बचने के लिए दुपट्टों की खरीदारी कर रही हैं। बाजार में भी फैशन को देखते हुए दुपट्टे व स्कॉर्फ लाए गए हैं। कई बड़े ब्रांड ने भी अपनी रेंज उतारी है। शहर के कर्ण बाजार में जयपुरी बंधेज, अमृतसरी फुलकारी, राजस्थान का गोटा-पट्टी वर्क, गुजरात के कॉटन दुपट्टे और अजरख प्रिंट (प्राकृतिक रंगों और जटिल डिजाइन) की सबसे अधिक मांग देखी जा रही है। साथ ही, सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाव के लिए हल्के कपड़े के दुपट्टे भी ट्रेंड में हैं।
कॉलेज और ऑफिस जाने वाली युवतियां इस बार शिफॉन, मलमल और लिनेन के हल्के और आरामदायक, लेकिन फैशनेबल दुपट्टे ज्यादा खरीद रही हैं। वहीं, जो युवतियां पारंपरिक परिधान में आधुनिकता चाहती हैं, वे प्रिंट, टाई-डाई (बंधेज) के दुपट्टों की ओर आकर्षित हो रही हैं। स्कार्फ भी इस बार महिलाओं के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं, क्योंकि ये गर्मी और धूप से सुरक्षा के साथ-साथ स्टाइलिश भी लगते हैं।
बिक रहे 50 से 70 दुपट्टे
दुकानदार कीर्ति बताती हैं कि इस बार दुपट्टों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है। हर दिन 50-70 दुपट्टे बिक रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब डिजाइनर और हल्के फैब्रिक वाले दुपट्टों की मांग ज्यादा है। खासतौर पर कॉलेज जाने वाली युवतियों को मलमल और अजरख डिजाइन वाले प्रिंट वाले दुपट्टे बहुत पसंद आ रहे हैं।
बंधेज के दुपट्टे अधिक लोकप्रिय
दुकानदार मानसी ने बताया कि राजस्थान, गुजरात और जयपुर से आने वाले बंधेज और लहरिया दुपट्टे हमेशा गर्मियों में लोकप्रिय रहते हैं। ये 100 रुपये से 600 रुपये तक की रेंज में खूब बिक रहे हैं। इस बार लिनेन और शिफॉन दुपट्टों की भी अच्छी मांग है। उनका कहना है कि बंधेज दुपट्टा गाढ़े रंगों से बना होता है, जो हल्के रंगों की वेशभूषा पर पहनने के लिए खरीदा जाता है।
रोजाना आते हैं 50 से 60 ग्राहक
दुकानदार अजय का कहना है कि उनकी दुकान पर हर दिन 100 से 150 युवतियां स्कार्फ और दुपट्टों की खरीदारी के लिए आ रही हैं। इनमें ज्यादातर स्कार्फ इस बार सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। ये स्कार्फ युवतियां गले में डालने और धूप से बचने के लिए खरीद रही हैं। इनकी कीमत 200 से 700 रुपये तक है और गर्मी के बढ़ने के साथ ही इनकी बिक्री और तेज होगी।
गोला पट्टी दुपट्टों की अधिक बिक्री
सोनिया का कहना है कि राजस्थान से आए गोटा-पट्टी और हाथ की कढ़ाई वाले दुपट्टों की बिक्री इस बार अच्छी हो रही है। 200 से 1500 रुपये तक की रेंज में यह दुपट्टे बिकते हैं और हर दिन 60-80 दुपट्टे आराम से बिक जाते हैं। उन्होंने बताया कि ये राजस्थानी दुपट्टे युवतियां खासकर सफेद वेशभूषा पर पहनने के लिए खरीदती हैं।
पेस्टल रंगों के दुपट्टों की भी मांग
मुस्कान ने बताया कि इस बार हल्के कपड़े वाले, पेस्टल रंगों, जो मुख्य रूप से गहरे रंगों में सफेद रंग को मिलाकर तैयार किए जाते हैं और फ्लोरल प्रिंट वाले दुपट्टे ग्राहकों की पहली पसंद बने हैं। उन्होंने बताया कि ये रंग कोमल, शांत और सुकून देने वाले होते हैं और अक्सर इन्हें हल्केपन से जोड़ा जाता है जो युवतियों को खासतौर पर पसंद आते हैं।