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Karnal News: नवविवाहिताओं में बढ़ रही बांझपन की समस्या

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। नवविवाहिताओं में बांझपन (इनफर्टिलिटी) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले यह समस्या कम उम्र में देखने को नहीं मिलती थी लेकिन अब 25 से 35 वर्ष की महिलाओं में भी यह आम हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि नवविवाहिताओं में पीसीओडी, हार्मोनल असंतुलन और देर से शादी होने के कारण गर्भधारण में भी देरी होना समस्या का प्रमुख कारण बन रहा है।

इसके अलावा बदलती जीवनशैली, खानपान की गलत आदतें और बढ़ता तनाव इनके कारणों में शामिल है। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 100 ओपीडी आती है, जिनमें सात से आठ महिलाएं इनफर्टिलिटी की समस्या को लेकर पहुंच रही हैं। जिला चिकित्सालय की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपा ने बताया कि बांझपन वह स्थिति है, जब महिला गर्भधारण नहीं कर पाती है।
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उन्होंने बताया कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। पीसीओडी , मासिक धर्म में परेशानी और संक्रमण, कारण बदलता खान पान जिनमें जंक फूड खाना, कई महिलाएं धूम्रपान करती हैं, अधिक तनाव, हार्मोनल असंतुलन और मुख्य कारण है कि देर से शादी और गर्भधारण की बढ़ती उम्र मुख्य कारण हैं। पहले महिलाएं 20 से 25 की उम्र में मां बन जाती थीं। अब 30 से 35 साल के बाद गर्भधारण करने का चलन है।

उन्होंने बताया कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर में गर्भधारण करने वाले अंडों की गुणवत्ता कम होने लगती है। इसके अलावा महिलाओं में पीसीओडी और थायराइड जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही है जो गर्भधारण को तेजी से प्रभावित करती है।

इससे इनफर्टिलिटी के कारण आज के समय में आईवीएफ की तरफ लोगों का रुझान भी अधिक बढ़ने लगा है। वहीं शादी के बाद महिलाओं में तनाव अधिक होने लगता है, जिसके प्रभाव शरीर पर पड़ता है। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि आजकल की युवतियों को शादी से पहले ही अपने शरीर की समस्याओं पर समय रहते ध्यान देना चाहिए। अनियमित मासिक धर्म को नजरअंदाज न करें और समय पर पीसीओडी जैसी समस्या का इलाज करवाएं, शरीर में पोषण की कमी न होने दे और आयरन कैल्शियम और फोलिक एसिड का पर्याप्त सेवन करें और अधिक वजन बढ़ने या घटने पर तुरंत जांच करवाएं। डॉ. दीपा ने बताया कि आजकल बांझपन का इलाज संभव है लेकिन इसके लिए सही समय पर चिकित्सा सहायता लेनी होगी।
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दो प्रकार की होती है इनफर्टिलिटी

डॉ. दीपा ने बताया कि इनफर्टिलिटी दो प्रकार की होती है। प्राइमरी इनफर्टिलिटी में महिलाओं में एक साल के भीतर गर्भधारण करने में दिक्कत आती है। द्वितीय इनफर्टिलिटी में यदि दूसरा बच्चा है तो गर्भधारण करने में दिक्कत आती है। प्राइमरी में अधिकतर नवविवाहित महिलाएं ही होती हैं, जिनमें पीसीओडी, हार्मोनल असंतुलन, थायराइड आदि की समस्या के कारण गर्भधारण नहीं हो पाता है। वहीं द्वितीय प्रकार में महिलाएं के यूट्रस में संक्रमण होना जिससे ट्यूब बंद हो जाती है, जिससे गर्भधारण नहीं हो पाता है।
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