महिलाओं की सुरक्षा के लिए बसों में पैनिक बटन महज दिखावटी ही हैं। अधिकांश महिलाओं और चालकों व परिचालकों को इनकी जानकारी ही नहीं है। कई बसों में ये लगे ही नहीं हैं। जहां लगे हैं उनमें से अधिकांश में खराब हैं।
संवाद की रिपोर्टर ने दोपहर 12 से एक बजे के बीच कुंजपुरा रोड पर बस स्टैंड से पांच बसों में सफर के दौरान हेल्प बटन के बारे में पड़ताल की। बस संख्या एचआर 64 जीवी 6987 में पैनिक या हेल्प बटन नहीं लगे थे। अन्य दो बसों में भी ये बटन नहीं लगे थे। इन बसों में दो स्टाॅप बटन जरूर लगे थे, जिनका उपयोग यात्री बस को अपने गंतव्य पर रोकने के लिए कर रहे थे।
बस संख्या एचआर 45 जीवी 8496 और एचआर 64 जीवी 6378 बस में पैनिक बटन तो लगे थे लेकिन खराब थे। बटन दबाने पर चालक तक कोई नोटिफिकेशन नहीं पहुंचा। चालक और परिचालक से जब इस बारे में पूछा तो उन्होंने ऐसे किसी बटन के बस में लगे होने के बारे में अनभिज्ञता जताई। चालकों ने बताया कि उन्हें इन बटनों के बारे में बताया ही नहीं गया है न ही यात्रियों की ओर से उपयोग किया जाता है।
राज्य बजट में भी महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैनिक बटनों का बसों व टैक्सियों में लगाने की घोषणा की गई थी। पैनिक बटन को खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए लगाया जाना था। किसी भी आपात स्थिति जैसे छेड़छाड़, विवाद या दुर्घटना की स्थिति में इसे तुरंत मदद पहुंचाने का माध्यम बनाया जाना है। परिवहन के जीएम कुलदीप सिंह ने बताया कि जिले में कुल 150 रोडवेज बसें चल रही हैं। इनमें से 97 बसों में पैनिक बटन लगे हुए हैं। 53 बसों में ये बटन नही लगे हैं।
लाल रंग का बटन, लिखा होता है हेल्पबस में हर सीट के पास एक हेल्प बटन दिया गया है। लाल के इस बटन पर तीन बार हेल्प हेल्प हेल्प लिखा होता है। इसे दबाने पर सिग्नल सीधा चालक तक जाता है। किसी महिला व यात्री को किसी प्रकार की परेशानी होती है तो वह इन बटनों का उपयोग कर सकता है। चालक व परिचालक के पास इससे अलर्ट पहुंच जाएगा और मदद भी मिलेगी। हालांकि इन बटनों का अलर्ट केवल चालक तक ही पहुंचता है न कि किसी कंट्रोल रूम तक।
नहीं पता पैनिक बटन के बारे में
एचआर 64 जीवी 6378 बस के चालक ने बताया कि उन्हें पैनिक बटनों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। बस में केवल स्टॉप बटन है जिसका सिग्नल पहुंच जाता है। यदि कोई यात्री स्टॉप बटन का उपयोग करता है तो तुरंत सहायता दी जाती हैं। पैनिक बटनों के बारे में उन्होंने कभी नहीं सुना।
चालक-परिचालक का प्रशिक्षण जरूरी, कंट्रोल रूम से जोड़े जाएं
- एडवोकेट संदीप राणा का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बसों में पैनिक बटन लगाए गए हैं। सबसे पहले चालक व परिचालकों को इनके बारे में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। महिलाओं को भी इनके बारे में जागरूक करना चाहिए। जानकारी होने पर ही वह आपात स्थिति में इन बटनों का प्रयोग कर सकेंगी। पैनिक बटनों को पुलिस कंट्रोल रूम या अन्य से जोड़ा जाना भी जरूरी है। केवल चालक तक अलर्ट के पहुंचने से पूर्ण सुरक्षा का मंतव्य हल नहीं होता।
-पैनिक बटन यदि किसी बस में काम नहीं कर रहे हैं तो जांच कर इन्हें ठीक कराया जाएगा। कई बसों में तकनीकी खराबी के कारण भी सिग्नल नहीं पहुंच पाता है लेकिन जो भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाएगा। चालक व परिचालकों को भी बटनों के बारे में बताया जाएगा। -कुलदीप सिंह, परिवहन जीएम