- स्मृति दिवस में उठी त्रासदी के बलिदानियों को शहीद का दर्जा देने की मांग, 350 परिवारों के लोग सम्मानित
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय मुल्तानी परिमंडल महासभा की ओर आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस में जब मंच पर विभीषिका की यादें ताजा हुईं तो लोगों की आंखें नम हो गईं। अपना सब कुछ गंवाने के साथ ही अपना धर्म बचाने को दी गई कुर्बानी जब परिजनों की जुबां पर आई तो रूह कांपने लगी। दूसरी तरफ इस दंश को सहन कर खुद स्थापित करके सामाजिक और व्यापारिक प्रतिष्ठा पाने वाले करीब 350 परिवारों के लोगों को असम के पूर्व राज्यपाल जगदीश मुखी ने सम्मानित करते हुए अभी और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
डॉ. मंगलसेन ऑडिटोरियम में रविवार को भारतीय मुल्तानी परिमंडल महासभा के अध्यक्ष प्रो.जोगिंद्र मदान की देखरेख में आयोजित समारोह की शुरुआत सीताराम मंदिर की महिलाओं ने मुल्तानी भाषा में तुलसी जी की आरती करके की। पूर्व ओएसडी संजय बठला, राज्य जन सूचना आयोग के आयुक्त संजय मदन, राज्य कर्मचारी संघ आयोग के सदस्य कपिल अत्रेजा, पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर राजेश अग्घी, समाजसेवी ओमप्रकाश अत्रेजा ने विभाजन की त्रासदी को याद किया। महामंत्री सुरेश हिंदुजा के संचालन में आयोजित समारोह में सोनिया चोपड़ा, सुषमा मक्कड़ और सतीश मिड्ढा ने गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद मुख्य अतिथि प्रो.जगदीश मुखी ने किशोर नागपाल सहित सभी को सम्मानित किया गया। महासभा के अध्यक्ष प्रो. जोगिंद्र मदान ने भूमिका में बारे बताते हुए परिचय करवाया।
देश का विभाजन बिना किसी योजना के किया गया : प्रो. मुखी
मुख्य अतिथि एवं असम के पूर्व राज्यपाल प्रो. जगदीश मुखी ने कहा कि विभाजन का निर्णय जल्दी में लिया गया था। देश का विभाजन बिना किसी योजना के कर दिया गया, जिससे विश्व की सबसे बड़ी त्रासदी घटित हुई। उन्होंने कहा कि विश्व में ऐसा पहला विभाजन हुआ जिसमें करोड़ों की संख्या में लोगों को इधर से उधर जाना पड़ा। हरियाणा में हमारे समाज के हर एक परिवार से शहादत हुई है। ऐसा कोई परिवार नहीं जिसने अपनी किसी प्रियजन को नहीं खाया हो। हमारा समाज विस्थापन के पश्चात कैंपों में नहीं रहा, क्योंकि उसे आश्रित रहना पसंद नहीं था। कैंपो में रहने की बजाय मजदूरी करके गुजारा किया।आज हमारे समाज के हर क्षेत्र में लोग उच्च स्थानों पर है। देश प्रथम का भाव हमारी विशेषता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन स्मृति दिवस की घोषणा करके हमें अपने इतिहास को याद रखने और उसे समय की घटनाओं पर चिंतन करने का अवसर दिया है।
विभाषिका की 14 कहानियां पढ़ कांपी रूह
डॉ. मंगल सेन ऑडिटोरियम में विभाजन त्रासदी की कई तस्वीरों के साथ 14 लोगों की आपबीती भी प्रदर्शित की गई थी, जिसे पढ़कर लोगों की रूह कांप गई। इसमें एक परिवार ऐसा भी था, जिसने अपने परिवार की महिलाओं को बचाने के लिए अपने हाथ ही 21 सिर कलम किए थे। भयावह मंजर की कल्पना करके लोगों की आंखों में पानी आ गया। इन सच्ची घटनाओं में बताया गया कि कैसे हजारों लोग अपने देश धर्म के लिए शहीद हो गए परंतु अपना धर्म परिवर्तन करना स्वीकार नहीं किया।
04... .. डा. मंगलसेन ऑडीटोरियम में भारतीय मुल्तानी परिमंडल महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में
04... .. डा. मंगलसेन ऑडीटोरियम में भारतीय मुल्तानी परिमंडल महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में
04... .. डा. मंगलसेन ऑडीटोरियम में भारतीय मुल्तानी परिमंडल महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में
04... .. डा. मंगलसेन ऑडीटोरियम में भारतीय मुल्तानी परिमंडल महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में