करनाल। हर मां-बाप का सपना होता है कि वह अपनी लाड़ली बिटिया की शादी धूमधाम के साथ करें लेकिन शादी की तैयारियों के बीच यदि बिटिया के माता पिता की मौत हो जाए तो बिटिया के अरमानों पर भी पानी फिर ही जाता है लेकिन ऐसी ही एक बिटिया कुमकुम को करनाल की एक संस्था ने उसके दूल्हे संग शानो-शौकत के साथ विदा करके उसके सपनों को नया आसमान दिया है।
बात कुरुक्षेत्र जिले के थानेसर की है, जहां एक पिता की चार बेटियां है, इसमें दो की शादी तो माता-पिता ने शादी कर दी थी। तीसरी बेटी कुमकुम की शादी तय कर दीथी, गाजेबाजे, हलवाई, टेंट सभी बुक कर दिए थ लेकिन घरों में खुशियां बिखेरने वाले ज्योति पर्व दिवाली से दो दिन पहले ही वह मनहूस दिन आया, जिसने दुल्हन बनकर नए संसार में जाने के सपने बुन रही कुमकुम के सपनों पर झकझोर दिया।
इस दिन एक सड़क हादसे में कुमकुम के माता-पिता दोनों की मौत हो गई। अब क्या करें, परिवार को भी कुछ समझ नही आ रहा था। तभी कुरुक्षेत्र के कथा वाचक पंडित राधिका शरण के संपर्क में कुमकुम के एक रिश्तेदार आए और पूरी घटना बताई। ये भी बताया कि मृतक माता पिता की बेटी की शादी एक दिसंबर को तय है।
कथा वाचक ने नगर खेड़ा फाउंडेशन करनाल के प्रधान मुकुल सैनी से इस बारे में बात की तो मुकुल सैनी ने बचन दिया कि इस बिटिया का कन्यादान उनकी फाउंडेशन के सदस्य करेंगे। आखिर,एक दिसंबर यानी कुमकुम के माथे कुमकुम (सिंदूर) के चमकने के वह तारीख आई तो सुंदर पंडाल सजा और फाउंडेशन सदस्यों और बिटिया के रिश्तेदारों ने गाजेबाजे के साथ बारात का स्वागत किया गया।
नगर खेड़ा फाउंडेशन के प्रधान मुकुल सैनी, कथा वाचक राधिका शरण महाराज, रॉबिन मल्होत्रा, संदीप राणा, सरबजीत सिंह, अमित खोखर और नवीन कुमार के अन्य सदस्यों ने भात भरा और बेटी के हाथ पीले करवा कन्यादान कर अपना फर्ज निभाया। कुमकुम की शादी में फाउंडेशन की ओर से जरूरत के समान के साथ 7100 नकद राशि, चांदी की चुटकी, चांदी की पाजेब , 11 लेडीज सूट, पांच साड़ी, आयरन प्रेस, गर्म कंबल और बारात के खाने पीने का खर्च भी फाउंडेशन के सदस्यों ने किया। संवाद