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Karnal News: अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत डॉक्टर तय करेगा न कि बीमा कंपनी

Wed, 18 Feb 2026 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी पाया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह न केवल शिकायतकर्ता के मेडिकल बिलों का भुगतान करे, बल्कि मानसिक परेशानी और अदालती खर्च के लिए भी मुआवजा दे।

करनाल के सेक्टर-8 निवासी मुबारक़ सिंह ने स्टार हेल्थ से स्टार हेल्थ एश्योरेंस इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, जिसकी अवधि 14 जून 2023 से 13 जून 2024 तक थी। 13 सितंबर 2023 को उन्हें तेज बुखार, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत के कारण निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां वह 15 सितंबर 2023 तक उपचाराधीन रहे। इलाज पर कुल 32 हजार 222 रुपये खर्च हुए। शिकायतकर्ता मुबारक़ सिंह ने बीमा कंपनी के पास क्लेम फाइल किया, तो कंपनी ने तीन अक्तूबर 2023 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि मरीज का इलाज आउटडोर पेशेंट के तौर पर हो सकता था और अस्पताल में भर्ती होने की कोई चिकित्सीय आवश्यकता नहीं थी।
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सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने बीमा कंपनी के तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत है या नहीं, यह इलाज करने वाले डॉक्टर को तय करना होता है कि न कि बीमा कंपनी को। कंपनी की ओर से क्लेम खारिज करना केवल धारणाओं और अनुमानों पर आधारित था, जिसका कानून में कोई आधार नहीं है। आयोग ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियां प्रीमियम लेने में तो बहुत रुचि दिखाती हैं, लेकिन जब जायज क्लेम देने की बारी आती है, तो वे बारीक नियमों और शर्तों का सहारा लेकर बचने की कोशिश करती हैं।
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आदेश के पालन के लिए 45 दिन का समय
आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को निर्देश दिए कि वह शिकायतकर्ता के इलाज पर आए खर्च के बिलों के अनुसार 31 हजार 822 रुपये का भुगतान करें। साथ ही इस राशि पर तीन अक्तूबर 2023 (क्लेम खारिज होने की तारीख) से लेकर वास्तविक भुगतान तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दें। इसके अलावा शिकायतकर्ता को हुई मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए आयोग ने कपंनी को 20,000 रुपये का हर्जाना लगाया है। वहीं कंपनी को कानूनी कार्रवाई पर आए खर्च के तौर पर उपभोक्ता को 11 हजार रुपये का भुगतान भी करना होगा। आयोग ने कंपनी को इस आदेश का पालन करने के लिए 45 दिनों का समय दिया है।
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