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Karnal News: स्मार्ट सिटी को नहीं बना पाए सेफ सिटी... कई जगहों पर आज भी नहीं तीसरी आंख का पहरा

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रामनगर फ्लाइओवर के टी प्वाइंट पर नहीं सीसीटीवी कैमरे।
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गगन तलवार
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करनाल। करीब आठ सालों में करनाल को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए तो कई काम हुए लेकिन शासन और प्रशासन शहर को सेफ सिटी नहीं बना पाया। आज भी कई जगहों पर तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरे का पहरा नहीं है। यहां केवल पुलिस गश्त, चौकीदारी और स्थानीय लोगों की सजगता से ही निगरानी होती है।

ऐसे में अपराध का ग्राफ भी बढ़ रहा है। स्मार्ट सिटी के तहत शहर में 29 मुख्य चौराहों और मार्गों पर 429 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। इसके बाद भी प्रत्येक मार्ग पर कई स्पॉट ऐसे हैं, जहां अभी सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। ऐसे में यहां रात तो दूर दिन में भी वारदात होती है तो पुलिस तुरंत आरोपियों तक नहीं पहुंच पाती। कई मामलों में फुटेज या सुराग न मिलने के कारण पुलिस भी कई दिनों तक जूझती है। ऐसी स्थिति में लोग भी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। वहीं कई जगह तो लोगों के घरों के बाहर लगे निजी सीसीटीवी कैमरों के बाद ही पुलिस जांच आगे बढ़ पाती है।
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स्थानीय निवासी एडवोकेट राजेश शर्मा, संदीप राणा और तेजपाल का कहना है कि ऐसी जगहों का भी सर्वे करके प्रशासन को यहां भी सीसीटीवी कैमरे लगवाने चाहिए। केवल कैमरा लगा होने से कई बार वारदात होने से बच जाती है और लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। कैमरे केवल ट्रैफिक चालान के लिए ही नहीं हैं, बल्कि लोगों की गतिविधियों पर निगरानी का भी सशक्त तरीका है।
- बेटियां और महिलाएं निकलने में करती हैं संकोच

एडवोकेट तमन्ना शर्मा, बीटेक छात्रा निकिता और समाजसेवी हीना सिंगला का कहना है कि मुख्य चौराहों पर कैमरे लगे हैं लेकिन कई गलियों व छोटे चौराहों पर कैमरे नहीं हैं। सेक्टर-32, रामनगर, पुराना शहर सहित कई ऐसी जगह हैं जहां दिन ढलने के बाद नशेड़ियों का जमावड़ा लग जाता है। यहां पर पुलिस की गश्त कम होने व कैमरे न होने पर कामकाजी महिलाएं और बेटियां यहां से गुजरने में भी संकोच करती हैं।



- बड़ी दिक्कत वहां, जहां स्ट्रीट लाइट भी नहीं

पूर्व उप जिला शिक्षा अधिकारी उर्वशी विग, एडवोकेट विनय शर्मा और प्रियंका काठपाल का कहना है कि आज भी कई सेक्टरों और ग्रामीण क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइटें नहीं जगती। यहां दिन ढलने के बाद दिक्कत सबसे ज्यादा आती है। प्रशासन को उन सभी जगहें जहां से लोगों का निकलना होता है, वहां पर सीसीटीवी कैमरे और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए।



सीसीटीवी का रहा अभाव

- अक्तूबर माह में दयाल सिंह कॉलोनी में किरयाने की दुकान पर बैठी महिला से सामान लेने के बहाने डेढ़ तोले की चेन झपटी।

- कुंजपुरा रोड से दयाल सिंह कॉलोनी में बहू के साथ खरीदारी करनी आई महिला के गले से तीन तोले का सोने का मंगलसूत्र दो बाइक सवार बदमाशों ने झपटा।

- 9 अक्तूबर की रात को हरियाणा पुलिस अकादमी के पीटीसी गेट के नजदीक सिकरी गांव निवासी रवि (21) को चार आरोपियों ने लूट के इरादे से रोका था। जब उसके पास कुछ नहीं मिला तो चाकू मारकर उसकी हत्या कर दी। ये चारों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

- मई माह में चार चमन के मोबाइल शोरूम के बाहर फायरिंग करके आरोपी भागे थे, पुलिस को उन्हें ढूंढने में कई दिन लगे।

- नवंबर माह में गांव झंझाड़ी के पास एसटीएफ ने विस्फोटक सामग्री बरामद की थी, यहां भी कैमरे नहीं थे। आरोपी के काबू आने पर खुलासा हो पाया।



वर्जन

नगर निगम में ही स्थापित आईसीसीसी के माध्यम से शहर के मुख्य चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है। और कहां कैमरों की जरूरत है, इसे लेकर सर्वे कराया जाएगा। - डॉ. वैशाली शर्मा, आयुक्त नगर निगम
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वर्जन

शहर का ज्यादातर हिस्सा सीसीटीवी की निगरानी में है। और कहां कैमरे लगाए जा सकते हैं, इसके लिए जगह तय की जाएंगी। शीघ्र इस दिशा में भी कार्य किया जाएगा। मौजूदा कैमरों से भी आरोपियों का सुराग लगा है। कई बड़ी वारदातों का भी खुलासा किया है। - नरेंद्र बिजारानिया, एसपी करनाल
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