संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार को विश्व डेंगू दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आयुष अधिकारी डॉ. चांद सिंह ने कहा कि डेंगू बुखार एक संक्रमण है, जो वायरस से होता है। डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों की रोकथाम करना है।
उन्होंने कहा कि डेंगू बुखार को हड्डी तोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इससे पीड़ित लोगों को इतना अधिक दर्द हो सकता है कि जैसे उनकी हड्डियां टूट गई हों। उन्होंने बताया कि डेंगू बुखार के कुछ लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, त्वचा पर चेचक जैसे लाल चकत्ते, मांसपेशियों और जोड़ों का दर्द शामिल हैं।
स्वास्थ्य निरीक्षक संजय ने बताया कि कुछ लोगों में डेंगू बुखार एक या दो ऐसे रूपों में हो सकता है, जो जीवन के लिए खतरा हो सकते हैं। डेंगू रक्तस्रावी बुखार है, जिसके कारण रक्तवाहिकाओं में रक्तस्राव या रिसाव होता है और रक्त प्लेटलेट्स का स्तर कम होता है। दूसरा डेंगू शॉक सिंड्रोम है, जिससे खतरनाक रूप से निम्न रक्तचाप होता है।
काउंसलर तमन्ना ने बताया कि डेंगू से बचने के लिए लार्वा पर नियंत्रण करना होता है। एडिज मच्छर कृत्रिम जल संग्रह टायर, बोतलें, कूलर, गुलदस्ते जैसे पात्रों में जनन करते हैं, जिन्हें अक्सर खाली करना चाहिए। प्रधानाचार्य विवेक सिंह बैनीवाल ने डेंगू के बारे में बच्चों को अवगत कराया। अध्यक्षता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. कैलाश गर्ग ने की।