माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति का मुद्दा दो बार विधानसभा में उठने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। दिसंबर माह के सत्र और हाल ही में बजट सत्र के दौरान विधायक ने यह मामला प्रमुखता से उठाया था लेकिन इसके बाद भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
शहर में नागरिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जैसी बड़ी स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं, फिर भी दिल के मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में अन्य जिलों में रेफर किया जा रहा है। रोजाना कई मरीजों को अंबाला, पानीपत, रोहतक या चंडीगढ़ भेजा जाता है। आपातकालीन स्थिति में यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
जब मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुका है और आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध हैं, तो कार्डियोलॉजिस्ट की नियुक्ति में देरी समझ से परे है। कई बार स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखे गए, जनप्रतिनिधियों ने भी आश्वासन दिए लेकिन मामला फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाया।
डॉक्टर न होने के कारण मरीजों को तत्काल रेफर करना मजबूरी बन जाता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी लेकिन पद सृजित होने की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारी स्तर पर जवाब यही मिलता है कि मामला उच्च स्तर पर विचाराधीन है।
- जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं है। इसके लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। जल्द तैनाती होने की संभावना है। - डॉ. पूनम चौधरी, सिविल सर्जन
- मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए मांग पत्र चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय को लिखा है। - डॉ. एमके गर्ग, निदेशक, कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज
- मामला विधानसभा में मजबूती से रखा गया, इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन भी दिया है। उम्मीद है शीघ्र लिखित में आदेश आएंगे। - जगमोहन आनंद, विधायक करनाल