करनाल। जिले में प्रतिवर्ष टीबी के मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है। ऐसे में वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत अभियान को पूरा करने और टीबी के हर मरीज तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष सात नए टीबी सेंटरों पर मोहर लगा दी है। जिससे इन सेंटरों पर भी लोग जाकर टीबी की जांच करवा अपना इलाज शुरू करवा सकें। इससे पहले जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में 15 सेंटर खुले हुए हैं। अब इनकी संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी।
टीबी नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. सिम्मी कपूर ने बताया कि जिले में प्रति वर्ष टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के बाद भी लोग स्वयं केंद्रों में जांच के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। जिससे स्वास्थ्य विभाग को घर-घर दस्तक देनी पड़ रही है।
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले चार वर्ष में 16,974 मरीज सामने आए हैं और 655 मरीजों की मौत हो चुकी है। फिलहाल जिले में 2218 मरीजों का इलाज चल रहा है। सिविल सर्जन डॉ. योगेश शर्मा सहित सभी डिप्टी सिविल सर्जन व मेडिकल ऑफिसरों ने मिलकर कुल 742 टीबी के मरीजों को गोद लेकर इलाज पूर्ण होने तक उन्हें राशन मुहैया कराया है। इसके अलावा 500 रुपये प्रतिमाह मरीजों को दिया जा रहा है। संवाद
क्या हैं टीबी के लक्षण
दो सप्ताह से ज्यादा खांसी, शाम के समय बुखार आना, खांसते समय बलगम में खून आना, छाती में दर्द या सांस फूलना, गर्दन या बगल में गांठें, भूख न लगना और वजन कम होना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। हरियाणा में एक लाख पर 265 मरीज टीबी के मिल रहे हैं। इन्हें वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत एक लाख पर 10 मरीज तक लेकर आने का लक्ष्य रखा गया है।
अब 22 सेंटरों पर करवा सकेंगे जांच
प्रोजेक्ट मैनेजर स्नेहा राणा ने बताया कि जिले में डीटीसी, नागरिक अस्पताल, नीलोखेड़ी अस्पताल, सीएचसी तरावड़ी, पीएचसी निगदू, सीएचसी निसिंग, पीएचसी जुंडला, पीएचसी जलमाना, असंध अस्पताल, सीएचसी बल्ला, सीएचसी घरौंडा, पीएचसी बरसत, सीएचसी इंद्री, पीएचसी कुंजपुरा, पीएचसी घीड़ व केसीजीएमसी में सेंटर चल रहे हैं। जल्द पीएचसी रामनगर, सीएचसी सांभली, पीएचसी मधुबन, पीएचसी गगसीना, पीएचसी भादसो, पीएचसी बड़ौता व पीएचसी कुखनी में टीबी सेंटर खोले जाएंगे।
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बीच में इलाज छोड़ना घातक
एमओ डॉ. प्रदीप ने बताया कि टीबी की दवाई बीच में छोड़ देने से यह सांस की टीबी से कई गुना घातक हो जाती है। जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों को अपना शिकार बनाती है। अस्पताल में फिलहाल हड्डी की टीबी के 100 मरीज, एमडीआर टीबी के 65 मरीज, ब्रेन की टीबी के आठ, गांठ की टीबी के 150 और पेट की टीबी के 75 मरीजों का दोबारा इलाज चल रहा है। उक्त मरीजों को हाई डोज दवाई दी जा रही है, क्योंकि टीबी गंभीर होने पर सामान्य दवाइयां असर करना बंद कर देती है।
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वर्ष अनुसार टीबी के मरीज और मौतें
वर्ष मरीज मौत
2019 3854 153
2020 4312 154
2021 4274 184
2022 4507 164
2023 2218 00 (मार्च तक)
कुल 19,165 655
(यह डाटा स्वास्थ्य विभाग की टीबी विंग से लिया गया है)