संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शहर के साझा बाजार में हर शनिवार और रविवार एक खास रौनक देखने को मिलती है। गांवों की महिलाएं पूरे हफ्ते अपने घरों में बैठकर हस्तनिर्मित सामान तैयार करती हैं और सप्ताह में इन्हीं उत्पादों को बेचने के लिए बाजार में पहुंचती हैं। मिट्टी के सामान, घर में बने आचार पापड़, हैंडीक्राफ्ट, कढ़ाई किए कपड़े, बैग, जूट उत्पाद और परंपरागत घरेलू चीजें इन सबके बीच बाजार में देसी हुनर की महक साफ महसूस होती है। सर्दी का मौसम आते ही महिलाएं अपने हाथों से ऊनी स्वेटर बनाकर बेच रही हैं, जो कहीं न कहीं परंपरा को भी बनाए रख रही हैं।
-स्वनिर्मित उत्पादों को बेचने से बढ़ रहा आत्मविश्वास
नीलोखेड़ी की रजनी ने बताया कि वह पूरे हफ्ते अपने गांव में ही सामान तैयार करती हैं और शनिवार व रविवार को साझा बाजार में बेचती हैं। गांव से शहर आकर अपने हाथों के बनाए उत्पाद बेचना हमारे लिए आर्थिक सहायता और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला कदम भी है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाओं का हुनर सिर्फ घर तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों तक पहुंच रहा है। रजनी ने बताया कि कई महिलाएं बताती हैं कि साझा बाजार ने उन्हें कमाने का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि समाज में पहचान और सम्मान भी दिलाया है।
-उत्पादों को बेचने से आर्थिक स्थिति में आया सुधार
संगोही की रहने वाली सरोज ने बताया कि अपने उत्पाद बेचकर मिली आमदनी से घर के खर्च में योगदान करने का सुकून मिलता है। कई महिलाएं अब अपने बच्चों की पढ़ाई से लेकर छोटे-मोटे खर्च खुद पूरे कर पा रही हैं। इससे उनमें आर्थिक आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ा है। उन्होंने बताया कि उनके पति दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, जिसमें घर का खर्च निकलना मुश्किल हो रहा था लेकिन जब से शहर में स्वयं के बनाए उत्पाद बेचने शुरू किए तो कहीं न कहीं आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिला।