संवाद न्यूज एजेंसी
इंद्री। नगर पालिका इंद्री का चुनाव हुए लगभग आठ महीने बीत चुके हैं लेकिन नपा उपाध्यक्ष का पद अभी भी रिक्त है। इंद्री उपमंडल अधिकारी अशोक कुमार मुंजाल ने इंद्री नपा उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए 27 अक्तूबर की तिथि तय की थी लेकिन उनके अचानक अस्वस्थ होने के कारण चुनाव स्थगित हो गया। अभी चुनाव की आगामी तिथि घोषित नहीं की गई है।
चुनाव स्थगित होने से उप प्रधान की दावेदारी करने वालों को झटका लगा है। चुनाव स्थगित होने को लेकर पार्षदों व लोगों में विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं। नगर पालिका उप प्रधान पद का चुनाव नगर पालिका परिसर में सोमवार को दोपहर 1:16 बजे होना था। चुनाव को लेकर प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार मुंजाल की अचानक तबीयत खराब होने से चुनाव स्थगित करना पड़ा। उप प्रधान पद को लेकर नपा पार्षदों में लगभग आठ माह से खींचतान चल रही थी। उप प्रधान पद के चुनाव कराने के लिए 24 अक्तूबर को पत्र जारी किया गया था। सोमवार को होने वाले उप प्रधान पद के चुनाव को लेकर पूरे शहर के लोगों की नजरें टिकी हुई थी।
उप प्रधान पद के चुनाव को लेेकर विधायक खपा
शहर में किसी भी राजनीतिक चुनाव को लेकर स्थानीय विधायक की अहम भूमिका होती है लेकिन नपा उप प्रधान पद के चुनाव को लेकर विधायक की नाराजगी साफ दिखाई दी। चुनाव को लेकर दोनों गुट विधायक रामकुमार कश्यप से उनके घर पर मिले थे लेकिन उन्होंने किसी को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। पार्षदों की चल रही उठापटक को लेकर शहर के विकास कार्यों को ग्रहण लग रहा है, जिससे विधायक पार्षदों से खफा दिखाई दे रहे हैं। नपा की हाउस की हुई पहली बैठक में विधायक ने शहर में होने वाले विकास कार्यों की चर्चा करने के साथ-साथ विकास कार्यो को लेकर कई मुद्दे भी रखे थे। साथ ही विधायक ने पार्षदों को नसीहत दी थी कि पार्षदों को शहर के विकास कार्यों में अपनी रुची दिखानी चाहिए। पार्षदों की खींचतान से शहर के विकास कार्यों में रुकावट आती है। माना जा रहा कि विधायक रामकुमार कश्यप ने उपप्रधान चुनाव को लेकर दूरी बनाई रखी।
गौरतलब है कि इस वर्ष दो मार्च को हुए निकाय चुनावों में इंद्री निवासियों ने पहली बार सीधे मतदान से नगर पालिका अध्यक्ष को चुना था। हालांकि भाजपा ने नगर पालिका चुनाव में पार्टी के निशान पर जसपाल बैरागी को अध्यक्ष पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया था लेकिन इंद्री की जनता ने भाजपा से बागी हुए व आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे राकेश पाल को समर्थन देकर विजयी बना दिया।