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पंद्रह दिन से अल्ट्रासाउंड केंद्र का डॉक्टर गायब

Thu, 24 Oct 2013 12:12 AM IST
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र में एलएनजेपी अस्पताल के अल्ट्रासाउंड विभाग में डाक्टर न होने से मरीजों को काफी परेशान आ रही है। मरीजों ने आरोप लगाया कि जब भी वे इस सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए आते है तो उन्हें डाक्टर मिलना तो दूर उन्हें कोई ठीक जानकारी भी नहीं दी जाती है।
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मरीजों के अनुसार उन्होंने कई बार दोपहर बाद चार बजे तक भी डाक्टरों का इंतजार किया, मगर कोई डाक्टर उपलब्ध नहीं हुआ। हर रोज इस सरकारी अस्पताल में सैकड़ों मरीज जिलाभर के गांवों और कसबों से आते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं डाक्टर न होने से काफी परेशान होती हैं। वहीं अस्पताल के डाक्टरों का अपना ही एक तर्क है।

बुधवार को भी सैकड़ों महिला मरीज अस्पताल में थीं जो अल्ट्रासाउंड के लिए आई थीं, लेकिन आज भी उन्हें डाक्टर नहीं मिला। अल्ट्रासाउंड के लिए पिछले दो सप्ताह से जिला के सरकारी अस्पताल में धक्के खा रहे मरीजों ने अमर उजाला को इसकी सूचना दी।
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मरीजों ने बताया कि वे पिछले 15 दिनों से अल्ट्रासाउंड विभाग के चक्कर लगा रहे हैं पर डाक्टर मिलना तो दूर विभाग के दरवाजे पर डाक्टर के अवकाश का नोटिस चस्पा मिलता है। पिछले दिनों में इस नोटिस पर डाक्टर छुट्टी पर है या कोर्ट में गए हैं, यह सूचना रोगियों को मिलती है।

एलएनजेपी अस्पताल में गांव लोहार माजरा वासी कृष्णा देवी, मिर्जापुर कॉलोनी वासी पूनम, मलिकपुर वासी रोशनी देवी, मिर्जापुर कॉलोनी वासी सुरेंद्र कुमार, कल्याण नगर वासी रामसुमेर, सतपाल कौर पिहोवा, सोना देवी पिहोवा और राजवंती कल्याण नगर ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से इस विभाग के चक्कर काट रहे हैं पर कोई भी डाक्टर यहां नहीं मिलता है।

कोर्ट में पेशी के लिए गए हैं डाक्टर
एसएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. मुकेश से बात की गई तो उन्होंने बताया कि डाक्टर लज्याराम एसएमओ कोर्ट में पेशी पर गए हुए हैं, जिस कारण कुछ समस्या आई है। उन्हाेंने यह भी बताया कि डाक्टर लज्याराम के पास कुरुक्षेत्र के साथ कैथल और यमुनानगर के मरीजों को देखना पड़ता है और कोर्ट पेशी के लिए भी जाना काफी जरूरी है।

प्रदेश में केवल सात अल्ट्रासाउंड डाक्टर
एलएनजेपी अस्पताल के एमएस डा. मुकेश के मुताबिक प्रदेश में केवल सात अल्ट्रासाउंड डाक्टर हैं, जिन्हें प्रतिदिन हजारों मरीजाें का चेकअप करना होता हैं। इतना हीं नहीं, इन डाक्टरों पर काम का दबाव इतना ज्यादा है कि काफी संख्या में डाक्टर सरकारी नौकरी छोड़ कर प्राइवेट प्रैक्टिस की ओर जा रहे हैं।
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