- क्लोन तकनीक के साथ ओपीयू-आईवीएफ को मिलाने पशु पैदा होने का समय 10 माह घटा
- देश में उच्च नस्लों की दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ाने के रास्ते खुले, प्रयोग सफल होने पर वैज्ञानिकों में उत्साह
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने पशु प्रजनन तकनीक में एक बड़ी छलांग लगाई है। यहां के वैज्ञानिकों ने 16 मार्च 2023 के क्लोन विधि से जन्मी गिर गाय गंगा को सिर्फ 18 महीने की आयु में हीट में लाकर उसके अंडाणुओं को लेने के बाद उन्हें ओवम पिकअप (ओपीयू) और आईवीएफ से जोड़कर देश की पहली गिर बछड़ी पैदा करने में सफलता हासिल कर ली है। ये गिर नस्ल की बछड़ी 13 जुलाई को शाहीवाल नस्ल की गाय की कोख से पैदा हुई है, जो पूर्ण रूप स्वस्थ है। वैज्ञानिकों की इस सफलता से गाय के हीट में आने का समय तो करीब 10 महीने कम हो गया है, साथ ही एक गाय के अंडालुओं से एक ही समय में 10 से 40 पशुओं को पैदा करने के रास्ते खुल गए हैं।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ.धीर सिंह ने बताया कि देश दुग्ध उत्पादन में दुनिया में अग्रणी है, लेकिन फिर भी भारतीय पशुओं में प्रति पशु औसत दुग्ध उत्पादकता कम है। भारत में गाय का औसत दूध तीन किलो 200 ग्राम है, जबकि अमेरिका में 27 किलो है। हम दुग्ध उत्पादकता
बढ़ाने पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 16 मार्च 2023 को एनडीआरआई में ही क्लोन तकनीक से डॉ.नरेश सेलोकर और डॉ.मनोज कुमार सिंह की टीम ने देश ही पहली गिर गाय गंगा को पैदा किया था। जो पूर्णरूप से स्वस्थ होने के साथ साथ लगातार उसकी स्वभाग, दुग्ध की पैदावार सहित कई अन्य गतिविधियों को भी परखा जा रहा था, इसी क्रम में एक और शोध किया गया, जिसमें क्लोन गाय गंगा के 18 माह की उम्र में ही हीटिंग की स्थिति वाले ओपीयू से 50 अंडे निकाले, इनमें से आईवीएफ तकनीक से 12 भ्रूण बने, इनमें से पांच को दूसरी किस्मों की गायों की कोख में प्रत्यारोपित किया गया। इन्हीं पांच में एक शाहीवाल गाय ने गिर नस्ल की बछड़ी को जन्म दिया है, ऐसा देश में पहली बार हुआ।
इनका नाम क्या रखा जाए, इस पर विचार किया जा रहा है।
क्लोन गाय की बछड़ी पैदा करने में सफलता तो मिली ही है, इसके साथ कई अन्य बड़े लाभ की संभावनाएं जगी है। सबसे बड़ी बात तो ये हुई, जिस हीट में आने से पशु बच्चे के पैदा होने की प्रक्रिया में सामान्य तौर पर 33 से 36 महीने लगते थे, वह नौ माह की गर्भावस्था मिलाकर सिर्फ 27 महीने में पूरी हो गई, नौ महीने का समय बच गया। हीट में आने का समय भी करीब आठ से 10 माह घट गया। इससे पशु प्रजनन में एक ही उच्च नृस्ल की एक ही समय में अंडाशय से 10 से 50 अंडाणु लेकर कई पशु पैदा किए जा सकते है, ये सभी प्रयोग सफल हो चुके हैं, जिससे वैज्ञानिक उत्साहित हैं।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ.धीर सिंह ने बताया कि खास बात ये है कि पहले क्लोन विधि से गिर गाय गंगा बनी, इसके बाद उसी के अंडालुओं से सरोगेट मदर के जरिए उसकी बछड़ी पैदा हुई। ये दो पीढियों के पैदा होने की प्रक्रिया 39 महीने में पूरी हो गई, जबकि सामान्य तौर पर इसमें 60 से 84 महीने (पांच से सात साल) लगते हैं। इससे ये उम्मीद प्रबल हो गई है कि हम क्लोनिंग और ओपीयू-आईवीएफ तकनीक को मिलाकर कम समय में अधिक अच्छे दुधारू पशु पैदा कर सकते हैं। एक गाय से एक महीने में तीन बार या उससे अधिक बार अंडाणु निकाले जा सकते हैं, एक बार में 50-60 तक अंडालु निकाल सकते हैं, जिन्हें 10 से 40 तक भ्रूण बनाकर दूसरे पशुओं में प्रत्यररोपित किएजा सकते हैं, जो सभी उतने से कम समय में ही पैदा हो सकते हैं, जितने समय में सिर्फ एक पशु पैदा होता।