माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पिछले एक दशक के दौरान धान और चावल का भाव तो कम बढ़ा लेकिन धान की लागत चार गुना बढ़ गई। चावल कारोबारियों का मुनाफा मामूली रूप से घटकर भी वह फायदे में रहे। मार किसान पर पड़ी है। उनका मुनाफा तो घटा ही है। लागत निकालने में भी दिक्कत हो रही है।
करनाल जिले में सर्वाधिक चावल निर्यात भी होता है और सीएमआर के लिए भी सरकार करनाल की मंडियों से अच्छी-खासी मात्रा में धान खरीद कर राइस मिलों को देती हैं। पिछले एक दशक की स्थिति को देखें तो धान को उगाने में आने वाली लागत में बड़ा इजाफा हुआ है। खाद हो या कीटनाशक, खरपतवारनाशक दवाइयां या फिर खेतिहर मजदूरी, सभी बढ़ गई हैं लेकिन एमएसपी में मामूली वृद्धि ही हुई है। कभी 20 रुपये तो कभी 100 रुपये, इस साल 69 रुपये प्रति क्विंटल बढ़े हैं।
चावल निर्यातकों का मुनाफा मामूली रूप से ही कम हुआ है। जब 1400 रुपये क्विंटल चावल मिलता था, तो भी चावल का दाम 2500 रुपये क्विंटल था, जिसमें अच्छा खासा मुनाफा शामिल था।
मद लागत- 2015 में लागत-2025 में
- रोपाई लेबर 1500 रुपये (प्रति एकड़) 4000 रुपये
- डीएपी रेट 1100 रुपये 1350 रुपये
- बीज 20 रुपये किलो 100 रुपये किलो
- मजदूर निराई 150 रुपये 3000 रुपये-
- खाद बुवाई लेबर 20 रुपये कट्टा 150 रुपये कट्टा
-स्प्रे (रोगनाशक) 500 रुपये एकड़ 5000 रुपये एकड़
-कटाई (कंबाइन) 1200 रुपये 2000 रुपये
- ट्राला किराया 1000 2000 रुपये
धान का मूल्य 1400 रुपये क्विंटल 2369 रुपये
चावल का मूल्य 2500 रुपये क्विंटल 3000 रुपये
लागत निकालना दुश्वार : तेजिंद्र
- खरकावली के किसान तेजिंद्र सिंह ने बताया कि दस सालों में धान की लागत चार गुना बढ़ गई है। वर्ष 2015 में प्रति एकड़ लगभग पांच हजार रुपये की लागत आती थी, वह लागत बढ़कर अब पांच हजार रुपये हो चुकी है। भले ही नई किस्मों, तकनीक से किसानों ने अपनी उपज बढ़ाई है लेकिन अब धान का मूल्य लागत के हिसाब से न बढ़ने के कारण किसान को अपनी लागत निकालना भी दुश्वार हो रहा है।
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किसान सर्वाधिक घाटे में है : रवनीत
कुटैल के किसान रवनीत चावला कहते हैं कि आज का युवा इसलिए ही खेती से किनारा कर रहा है, क्योंकि खेती में लागत तो बढती ही है लेकिन मुनाफा घट रहा है। व्यक्ति का रहन सहन खानपान सभी कुछ महंगा हो रहा है, बच्चों की पढ़ाई, चिकित्सा अत्यधिक महंगी हो रही है। ऐसे में अपेक्षित फसल मूल्य न मिलने से खेती घाटे का सौदा लगने लगी है, सभी मुनाफा कमा रहे हैं लेकिन किसान ही सर्वाधिक घाटे में हैं।
भाव में खास अंतर नहीं : संजय गुप्ता
तरावड़ी के चावल कारोबारी संजय गुप्ता कहते हैं कि चावल के रेट में कोई खास अंतर पिछले दस सालों में नहीं आया है। करीब 20 प्रतिशत तक की चावल के भाव बढ़े हैं। जो चावल 10 दस साल पहले 2000 से 2500 रुपये तक था, वह अब 3000 से 3200 रुपये तक है। चावल कारोबारियों का मुनाफा घटा है। चावल के दाम पर डिमांड पर आधारित होते हैं।
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घाटे में है राइस मिलर्स : नीरज मित्तल
- करनाल राइस मिल एसोसिएशन के पूर्व प्रधान नीरज मित्तल ने बताया कि सीएमआर के लिए जो चावल सरकार खरीदती है, इसमें तो राइस मिलर को किराया ही मिलता है लेकिन महीन धान जिसकी घरेलू मांग होती है या जो चावल निर्यात होता है, इसके रेट मांग आधारित होते हैं। दस साल पहले जो धान 1300-1400 रुपये को मिलता था, वह आज 3000 से 3500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। मिलिंग चार्ज सरकार ने दस सालों में एक रुपया नहीं बढ़ाया। जिससे राइस मिलर्स घाटे में हैं।