फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Karnal News: बसताड़ा खेल परिसर के हालात बदतर

विज्ञापन
विज्ञापन
सुखदेव चौहान
विज्ञापन

करनाल। बसताड़ा गांव में खिलाड़ियों के रोजाना के अभ्यास के लिए बनाए गए राजीव गांधी खेल परिसर के हालात बद से बदतर हैं। भवन के खिड़की, दरवाजे व रोशनदान टूटे पड़े है। मैदान उबड़-खाबड़ है, जिस पर घास खड़ी है। बास्केटबॉल हॉल का एक पोल टूटा पड़ा है। वॉलीबाल कोर्ट में नेट ही नहीं है। यहां बनाया गया भवन जर्जर हो चुका है जो कभी भी गिरकर बड़े हादसे को न्यौता दे सकता है।
देखरेख के अभाव में यह मैदान जंगल जैसा नजर आता हैं। यहां पर भवन के चारों ओर का पेंट खराब हो चुका है। शौचालय गंदगी से लबालब है, बिजली के उपकरण टूटे पड़े है। खेल मैदान की देखरेख के लिए किसी सुरक्षा कर्मी की ड्यूटी नहीं लगाई गई है। खिलाड़ियों को अभ्यास करवाने के लिए विभाग की ओर से किसी भी कोच की नियुक्ति नहीं की गई है।
विज्ञापन

जब इस खेल परिसर का निर्माण करवाया गया था तो दावा किया था कि अभ्यास से आसपास के गांवों के खिलाड़ियों का खेल स्तर बेहतर होगा। अब इस मैदान में खिलाड़ियों के बजाय बेसहारा पशु, आवारा कुत्ते व शरारती तत्व ज्यादा नजर आते हैं। खेल परिसर में लाइट की सुविधा न होने के कारण रात के समय नशेड़ी यहां पर मादक पदार्थों का सेवन करते है। यहीं नहीं खिलाड़ियों के पीने के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है।
करीब चार साल पहले भी खेल विभाग की ओर से पंचायती राज विभाग को बसताड़ा के खेल परिसर के कायाकल्प का जिम्मा सौंपा गया था। इस कार्य के लिए जिलेभर के सात राजीव गांधी खेल परिसरों के लिए करीब दो करोड़ रुपये का बजट पास हुआ था। बावजूद इसके देखरेख के अभाव में फिर से इन खेल परिसरों के हालात खस्ता हो चुके है।

बॉक्स
खेल परिसर बना नशेड़ियों का अड्डा
खिलाड़ी राकेश, राजकुमार, राजीव, संजीव ने बताया कि नेशनल हाईवे के नजदीक होने के कारण यह खेल परिसर नशेड़ियों का अड्डा बना हुआ है। शाम होते ही अंधेरे का फायदा उठाकर आस-पास के लोग यहां महफिल जमा कर बैठते है। यही नहीं मैदान का निरीक्षण करने पर यहां शराब व बीयर की खाली बोतलें मिली है। इस कारण से अब युवा खिलाड़ी खेल परिसर में आने से भी कतराने लगे है।
विज्ञापन


वर्जन
राजीव गांधी खेल परिसरों के दोबारा नवीनीकरण के लिए एस्टीमेट पंचायती राज विभाग से तैयार करवाया गया है। टेंडर के बाद इनके कायाकल्प का कार्य शुरू किया जाएगा। खेल परिसरों में कोच की सुविधा ना होने से परेशानी जरूर है। मुख्यालय से इस दिशा में मार्गदर्शन मांगा गया है। जिले के खिलाड़ियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। - सुधा भसीन, जिला खेल अधिकारी, करनाल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें