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Karnal News: सफेदपोश और अफसरों की मिलीभगत, भुगत रहा आम आदमी

Mon, 06 Oct 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। शहर के बाहरी क्षेत्र और अवैध कॉलोनियों में बस चुकी 80 प्रतिशत आबादी आज भी रजिस्ट्री की बजाए एग्रीमेंट पर है। अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की बिक्री एग्रीमेंट पर ही होती है। अगर सरकार एग्रीमेंट पर सख्ती से नजर रखे तो अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाया जा सकता है। अवैध कॉलोनी का काम कुछ सफेदपोश करते हैं, अधिकारी मदद करते हैं। अधिकारियों पर भी सख्ती करनी चाहिए।
रविवार को अमर उजाला कार्यालय में अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लगाने के मुद्दे पर संवाद में शहर के लोगों ने अफसरों और कॉलोनाइजरों के गठजोड़ को अवैध कॉलोनियों के लिए जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि इस मिलीभगत का खामियाजा आम आदमी भुगतता है। क्योंकि कॉलोनाइजर प्लाॅट बेचकर मुनाफा कमा चुका होता है, अवैध निर्माण पर कार्रवाई से जो नुकसान होता है वह आम आदमी भुगतता है।
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जिम्मेदारी तय करनी चाहिए
- रिटायर्ड पीआरओ जेल रामप्रकाश शर्मा ने कहा कि लोग सस्ते दामों पर प्लॉट लेने के चक्कर में फंस जाते हैं। फिर रजिस्ट्री की औपचारिकताएं बहुत होती हैं। इसलिए वे एग्रीमेंट में फंस कर रह जाते हैं। इसके लिए सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। अफसरों और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। ताकि जरूरतमंद लोगों के साथ अन्याय न हो।
रात में होता है निर्माण
- रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर सुभाष यादव ने कहा कि अवैध कॉलोनी काटने की आम आदमी की हैसियत नहीं है। होती तो वे वैध कॉलोनी काटते। दिन में अवैध कॉलोनी पर कार्रवाई होती है और रात को निर्माण शुरू हो जाता है। आजकल तो कुछ सफेदपोश रेरा से मंजूरी भी पिछले रास्ते से करा लेते हैं। इनके खिलाफ सरकार को कारगर कदम उठाना होगा।
निर्माण को गिराएं नहीं
- रिटायर्ड न्यायालय अधिकारी दुलिया राम शर्मा ने कहा कि पहले जो कॉलोनी अवैध होती हैं फिर इनको वैध करवा दिया जाता है। इनको रोकना है तो इनमें बिजली, पानी, सीवर के कनेक्शन नहीं देने चाहिए। फिर जब लोग मकान बना लेते हैं तो उनके मकान नहीं गिराने चाहिए। या तो अवैध कॉलोनी कटने ही नहीं देनी चाहिए और अगर वहां निर्माण हो चुके हैं तो उनको गिराना नहीं चाहिए।
एग्रीमेंट पर नजर रखें
- रिटायर्ड न्यायालय अधिकारी अरुण गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम के बाद भी जमीन, फ्लैट आदि का रेट लाखों में है। तो ऐसी योजना का क्या फायदा। अवैध कॉलोनी का सारा कारोबार एग्रीमेंट से होता है। सरकार को स्टांप वेंडर से लेकर लिखने वाले, नोटरी और लिखित एग्रीमेंट पर नजर रखनी चाहिए। ताकि पूरा रिकॉर्ड सरकार के पास रहे।
चोर रास्तों को बंद करें
- नगर निगम से रिटायर्ड अस्सिटेंट ऋषिपाल ने कहा कि सरकार की शहर पर भूमाफिया सक्रिय हैं। प्लॉट काटने से पहले खरीदी गई कृषि योग्य भूमि की जमीन भी एग्रीमेंट पर चलती है। अगर किसी भूमाफिया की राजनीतिक पैठ नहीं है तो उसकी कॉलोनी तुंरत गिरा दी जाएगी। सरकार को इन चोर रास्तों पर लगाम लगानी चाहिए।
अनदेखी से बढ़ी दिक्कत
- हरियाणा पर्यटन विभाग से रिटायर्ड अधिकारी मोहिंद्र सिंह नरवाल ने बताया कि अवैध कॉलोनी को कटवाने के जिम्मेदार अफसर हैं। गरीबों पर मार होने से अच्छा है कि जिम्मेदार अफसरों को जेल होनी चाहिए। अफसरों पर कार्रवाई शुरू हो जाए तो अवैध कॉलोनियों पर अंकुश लग जाएगा। अनदेखी से ही दिक्कत बढ़ी है।
कार्रवाई नहीं करते अफसर
- अध्यापक संजीव शर्मा ने कहा कि अवैध कॉलोनी रातोंरात नहीं कटती। इसमें समय लगता है। इसकी जानकारी सभी अफसरों को होती है लेकिन वे जानबूझकर कार्रवाई नहीं करते। अगर कॉलोनी काटी जा रही है तो उस पर तुंरत एक्शन लेना चाहिए। बाद में तो सिर्फ जरूरतमंदों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
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सरकार संवेदनशील बने
- शहरवासी लव खरबंदा ने बताया कि सरकार को सुविधाएं देनी चाहिए। जरूरतमंद लोगों को सस्ते रेट पर मकान बनाने के लिए प्लॉट देने चाहिए। किसी जरूरतमंद के मकान को गिराना गलत है। सरकार की ओर से सस्ते प्लॉट और मकान मिलेंगे तो क्यों कोई इन अवैध कॉलोनियों के चक्कर में पड़ेगा। सरकार और संवेदनशील बने।
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