माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। पहली बार नगर निगम ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि विकास कार्यों पर व्यय करने का बजट तैयार किया है, जो पिछले बजटों से 60 फीसदी अधिक है। वार्डवार एजेंडे में 20 वार्डों के पार्षदों ने गलियां निर्माण, सीवरेज, पेयजल, पार्क, सड़कों आदि की कई तरह की समस्याएं लिखकर दी हैं, जिन्हें एजेंडे में शामिल करते हुए 14 प्रस्तावों को एजेंडे में स्थान दिया गया है, लेकिन पिछली बैठकों में पारित प्रस्तावों पर क्या कार्य किए गए, उसकी एक्शन टेकेन रिपोर्ट भी अधिकारियों ने तैयार कर ली है, जिसमें कोई न कोई कमी या बहाना बनाकर वे कार्य न किए जाने की वजह लिख दी है। हालांकि नगर निगम इस बार शहर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना भी बना रहा है, जिससे लोगों को दूषित पानी शुद्ध करके पीने योग्य बनाया जा सकेगा। नगर निगम हाउस की बैठक मंगलवार सुबह 11 बजे से नगर निगम कार्यालय में होगी।
बजटीय बैठक तो वित्त वर्ष के अंतिम दिन भी आयोजित की गई थी, जिसमें आम बजट को मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन मंगलवार को नगर की सरकार का संशोधित आम बजट पारित किया जाएगा। जिसमें कुल 303 करोड़, 30 लाख, 83 हजार 224 रुपये के सापेक्ष 211 करोड़, 68 लाख, 50 हजार रुपये के व्यय का बजट तैयार किया गया। आय और व्यय सापेक्ष 49 करोड़, 97 लाख, 48 हजार 763 रुपये के लाभ का बजट पारित होने जा रहा है। अहम बात ये है कि इस बार बजट में 104 करोड़, 66 लाख रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए जाएंगे। जबकि 2021 में विकास कार्यों पर प्रस्तावित व्यय 36 करोड़ रुपये था।
कोई न कोई कमी बताकर तैयार की एक्शन टेकेन रिपोर्ट
हाउस की बैठक में संशोधित बजट को मंजूरी देने के बाद अधिकारियों द्वारा 18 जनवरी की बैठक में पारित प्रस्तावों पर एक्शन टेकेन रिपोर्ट देने की बात कही गई है। इसमें एजेंडे के साथ ही अधिकारियों ने अपना जवाब भी जोड़ दिया है, जिसमें सभी 30 प्रस्तावों व आउट ऑफ एजेंडा चार प्रस्तावों पर कोई न कोई कमी व समस्या बताकर कार्य न होने या बीच में रुक जाने की बात कही गई है। इस एक्शन टेकेन रिपोर्ट से पार्षद कितना संतुष्ट होंगे, ये तो हाउस की बैठक में ही पता चलेगा।
आवारा पशुओं से निजात पर हो सकता है शोरशराबा
पिछली कई बैठकों में शहर की सबसे बड़ी समस्या के रूप में कुत्तों, बंदरों सहित आवारा पशुओं की समस्या उठती रही है, लेकिन इसके बाद भी नगर निगम ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है, न ही अभी तक इसका कोई टेंडर दिया गया है। पिछले वर्षों में कुत्तों की नसबंदी व बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू तो किया था, लेकिन कभी कोरोना के कारण तो कभी किसी और वजह से उसे बीच में छोड़ दिया गया है। पिंगली डेयरी शिफ्टिंग का मामला डेढ़ दशक से चल रहा है, हर बैठक में उठता है, लेकिन कोई खास प्रगति नहीं हो पाती है। करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी सीवरेज व गंदे पानी की समस्या शहर का पीछा नहीं छोड़ रही है।
पार्षद के एजेंडे में पेयजल नहीं
हाल में निगमायुक्त के साथ वार्ड 15 के पार्षद युद्धवीर सैनी की बैठक हुई। उसी दिन शाम को दो महीने से पेयजल नहीं आने या गंदा पानी आने की समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों ने रास्ता जामकर विरोध प्रदर्शन भी किया, लेकिन हाउस की बैठक में रखने के लिए पार्षद ने सात बिंदुओं का मांगपत्र दिया है, जिसमें पेयजल की समस्या शामिल नहीं है। हालांकि इससे पहले पार्षद ये समस्या सदन में रख चुके हैं।
कोरोना के बाद अब होगा शहर का चहुंमुखी विकास
यह पहला मौका है जब निगम ने विकास कार्यों के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक बजट रखा है। कोरोना काल के बाद अब शहर का चहुंमुखी विकास होगा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के बारे में भी विचार किया जा रहा है, जिससे पानी को उपचारित करके पीने योग्य बनाकर पेयजल की मांग को पूरा किया जा सके। शहर स्मार्ट बन रहा है, मुख्यमंत्री के आशीर्वाद से शहर के विकास में कोई कमी नहीं रखी जाएगी।
- रेणू बाला गुप्ता, महापौर नगर निगम करनाल