करनाल। देश में उपलब्ध दुधारू पशुओं से दुग्ध की उत्पादकता देखें तो भैंसों से दूध का कुल औसत उत्पादन 5.21 लीटर प्रतिदिन है। इनमें देश में उपलब्ध विदेशी नस्लों की गायों से औसत दुग्ध उत्पादन 8.12 लीटर और देसी गायों से 3.37 लीटर। अब वैज्ञानिकों के सामने देसी गायों से दुग्ध की उपलब्धता बढ़ाना बड़ी चुनौती है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन तेजी हो रहा है, जो विदेशी नस्लों की गायों के लिए उचित नहीं माना जा रहा है जबकि देसी गायों में जलवायु अनुकूलता माैजूद है।
इसी के मद्देनजर देश के वैज्ञानिकों का ध्यान अब देसी गायों के संवर्धन पर है। इसके लिए कई तरह की तकनीक विकसित की जा रही है और कई अनुसंधान किए जा रहे हैं। इसमें क्लोनिंग तकनीक, जीन एडिटिंग, सेक्स सीमेन तकनीक प्रमुख हैं।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन के खतरों को पहचान कर इससे निपटने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके अंतर्गत देश में उपलब्ध जलवायु अनुकूल पशुओं की अनुसंधानिक स्तर पर पहचान कर ली गई है। इसमें थारपारकर, साहीवाल, गिर आदि कुछ नस्लें चिह्नित की गई हैं, जो जलवायु अनुकूल हैं। इनके संवंर्धन के प्रयास किए जा रहे हैं और इनकी संख्या में वृद्धि के लिए कई तकनीकें अपनाई जा रही हैं। एनडीआरआई में तो लगातार अनुसंधान चल ही रहे हैं, इसके साथ-साथ देश के कई अन्य संस्थानों में भी इसके लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं ताकि विपरीत जलवायु में भी देश के दुग्ध उत्पादन को बरकरार रखा जा सके।
उल्लेखनीय है कि श्वेत क्रांति के दाैर में भारत का दुग्ध उत्पादन हर साल 5.85 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के अनुपात में बढ़ रहा है। वर्ष 2022-23 के आंकड़ों के मुताबिक देश की प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 459 ग्राम प्रतिदिन थी, जो अब और बढ़ी है।
वर्ष 2047 तक एक लीटर प्रति व्यक्ति दुग्ध उत्पादन करने के लक्ष्य को पाने हेतु राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) समेत अन्य संस्थान शिद्दत के साथ जुटे हुए हैं मगर इस दौरान जलवायु परिवर्तन के कारण कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए कई तरह के अनुसंधानिक और तकनीकी आधारित प्रयास शुरू किए गए हैं। पिछले एक दशक में देश में दूध का उत्पादन लगभग 57 प्रतिशत से भी अधिक बढ़ा है। 10 वर्ष पूर्व सिर्फ 303 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की उपलब्धता थी, जो अब 459 ग्राम हो गई है। एनडीआरआई के वैज्ञानिकों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूध की आपूर्ति की बात करें तो दुनिया के कुल दुग्ध उत्पादन का 24 प्रतिशत से अधिक सिर्फ भारत में होता है। पिछले पांच सालों से भारत में ये उत्पादन 5.85 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
दूध एक संपूर्ण आहार है और देश में दुग्ध की उपलब्धता के साथ-साथ दूध की खपत भी बढ़ रही है। जिसे पूरा करते हुए प्रति व्यक्ति, प्रति दिन दुग्ध की उपलब्ध का जो लक्ष्य रखा गया है, उसे हम निश्चित तौर पर वर्ष 2047 तक पूरा कर लेंगे। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए देशभर में बड़े स्तर पर प्रयास चल रहे हैं, देसी गाय निश्चित तौर पर अधिक जलवायु सहनशील पाई गई है, उन्हें चिह्नित कर उनकी संख्या में वृद्धि के प्रयास भी चल रहे हैं। - डॉ. धीर सिंह, निदेशक, राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, (एनडीआरआई) करनाल।