नौ माह के बाद श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर पहुंचे संत पीयूष मुनि महाराज
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। चातुर्मास काल खत्म होने पर करीब नौ महीने के बाद श्री आत्म मनोहर जैन आराधना मंदिर में पहुंचे संत पीयूष मुनि महाराज के मकर संक्रांति पर्व पर प्रवचन सुनने के लिए मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस मौके पर पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि बदले में कुछ पाने या मिलने की अपेक्षा से ऊपर उठकर सिर्फ देने की नीयत से दिया गया दान सात्विक और सर्वश्रेष्ठ होता है।
संत कुछ पाने की अपेक्षा से ऊपर उठकर दिया दान सर्वश्रेष्ठ : पीयूष मुनि महाराज ने कहा कि बारह सक्रांतियों में से अंग्रेजी नव वर्ष में पहली बार ये संक्रांति आई है जो दान, पूजा-पाठ आराधना-उपासना करने की प्रेरणा देने वाला सुअवसर है, जो हमें सीख देता है कि हमें अपना मूल्यवान समय तथा जीवन सत्कार्यों से सार्थक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवग्रहों में सबसे अधिक प्रकाशमान, आत्मा के कारक तथा सृष्टि से अंधकार का नाश कर उज्ज्वलता प्रसारित करने वाले सूर्य नारायण का मकर राशि, जो उसके पुत्र शनि की राशि है, उसमें प्रवेश करना माघ महीने की संक्रांति है।
पौराणिक मान्यतानुसार यह संक्रांति भगवान आशुतोष का भगवान विष्णु को आत्मज्ञान का दान, भीष्म पितामह द्वारा देह त्याग, गंगा के धरा पर अवतरण, देवताओं के दिन के प्रारंभ का शुभ मांगलिक प्रसंग है, जिस दिन किया गया शुभ कल्याणकारी कार्य अनेक गुना अधिक फलदायक होता है। परंपरा कहती है कि मकर संक्रांति के दिन किया अन्नदान, किसी भी प्रकार की सेवा सफल होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धा तथा विश्वास के साथ हर मंगल अवसर पर नेक कार्य करने में कोताही न करने का संकल्प करना चाहिए।