पर्यावरण संरक्षण समिति की बैठक मंगलवार को सेक्टर-13 स्थित कार्यालय में हुई। इसमें प्रदेश में थर्मल प्लांटों की ओर से नियमों की अवहेलना किए जाने पर चर्चा की गई।
डॉ. डीएन गांधी ने बताया कि थर्मल प्लांटों से निकलने वाली गैसों से श्वास रोग, फेफड़ों की बीमारी अस्थमा और चमड़ी के रोग बढ़ रहे हैं। इन प्लांटों में सुरक्षा के उपकरण न लगाए जाने के कारण क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण बढ़ रहा है।
समिति अध्यक्ष एसडी अरोड़ा ने बताया कि इस बारे में सुप्रीमकोर्ट ने दिशा निर्देश दिए थे कि थर्मल प्लांटों में अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाए जाएं। अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने भी ऐसे ही निर्देश दिए थे।
थर्मल प्लांटों के कारण स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो, इसके लिए उनमें सुरक्षा उपकरण लगाने जरूरी हैं। डॉ. गांधी ने बताया कि मिल्क डेयरी प्लांट में भी दूध से पनीर बनाने पर जो प्रोडक्ट बचता है, उससे एनडीआरआई में पेय पदार्थ बनते हैं।
लेकिन प्राइवेट मिल्क प्लांटों में उसे बाहर नालियों में बहा दिया जाता है, जोकि गंदगी में मिलकर सीवरेज से भी ज्यादा बदबू पैदा करता है और वातावरण को प्रदूषित करता है। इन प्लांटों में भी पर्यावरण सुरक्षा के आधुनिक उपकरण लगाए जाने चाहिए।
समिति ने सरकार से मांग की कि इस विषय पर ठोस कदम उठाए और इन प्लांटों को पर्यावरण सुरक्षा नियमों की पालना के लिए बाध्य करें। इस अवसर पर आरके कोहली, एमसी पाहवा, कंवल भसीन, प्रेम प्रकाश लूथरा, एलडी मदान, हीरा लाल चौधरी, ओएन मलिक एवं ईश्वर छाबड़ा उपस्थित रहे।