एनसीआर में शामिल हुए करनाल की सड़कों पर दौड़ने वाले करीब दस हजार वाहनों
के पहिये अब थम जाएंगे। दस साल पुराने डीजल वाहन और 15 साल पुराने पेट्रोल
वाहनों पर एनजीटी ने पाबंदी लगा दी है।
एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल)
के आदेशों को बाद अब परिवहन विभाग ने भी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए
प्रदेशभर के एनसीआर में शामिल जिलों को ऐसे वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट
देने से इंकार कर दिया है। करनाल में भी पिछले कई दिनों से पुराने वाहनों
को एनओसी नहीं दी जा रही है। साथ ही आरटीए कार्यालय ने पुराने वाहनों की
लिस्ट बनानी शुरू कर दी है। उधर, पुराने वाहन चालकों में इस फैसले को लेकर
हड़कंप मचा है और इस फैसले के विरोध में खड़े हो गए हैं।
हाल ही में
करनाल एनसीआर में शामिल हुआ है। एनसीआर में शामिल प्रदेश के सभी 14 जिलों
में परिवहन विभाग ने एनजीटी के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि दस साल
पुराने डीजल वाहन व 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट
जारी न किया जाए, साथ ही ऐसे वाहनों की लिस्ट बनाई जाए।
इस फैसले के तहत एक
अप्रैल 2005 से पहले के डीजल वाहन और एक अप्रैल 2000 से पहले के पेट्रोल
वाहन सड़कों पर नहीं दौड़ पाएंगे। आदेश पत्र मिलते ही आरटीए कार्यालय ने
पुराने वाहनों को दिए जाने वाले फिटनेस सर्टिफिकेट पर रोक लगा दी है।
वाहनों की बात करें तो विभाग का प्राथमिक आकलन है कि करीब दस हजार वाहन इस
फैसले से प्रभावित होगे। इनमें तीन हजार ट्रक, 1500 छोटे वाहन और करीब 2500
आटो शामिल हैं। इसके अलावा करीब तीन हजार निजी वाहन भी इसमें शामिल हैं।
विभाग दस और 15 साल पुराने वाहनों की लिस्ट बनाने में जुट गया है।
आधे से ज्यादा कामर्शियल वाहन
सड़क
से उतरने वाले कुल दस हजार वाहनों में से आधे से ज्यादा कामर्शियल वाहन
हैं। ट्रक यूनियन के प्रधान पलविंद्र सिंह का कहना है कि ऐसे में करीब
साढ़े पांच हजार वाहन सड़क से नीचे उतर जाएंगे, अगर ऐसा हुआ तो काफी लोग भी
सड़कों पर आ जाएंगे, क्योंकि उनकी कमाई का जरिया यही है। उन्होंने बताया
कि तीन हजार ट्रक और एक हजार से ज्यादा कैंटर और दूसरे वाहन शामिल हैं। अगर
ये सारे वाहन बंद हो गए तो व्यापार पर काफी असर पड़ेगा।
मीटिंग में गरजे वाहन चालक
मामले
को देखते हुए शुक्रवार को सेक्टर-4, ट्रांसपोर्ट नगर में ट्रक यूनियन की
मीटिंग हुई। इसमें प्रधान पलविंद्र सिंह बेदी व उनके काफी संख्या में ट्रक
आपरेटर इकट्ठे हुए और ताजा मामले पर मंथन किया। फैसले के विरोध में
आपरेटरों ने सरकार के खिलाफ भड़ास निकाली। इसके बाद सभी हरियाणा सिख
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के युवा प्रधान अमरेंद्र सिंह अरोड़ा से मिले और
उन्हें मांग पत्र सौंपा। छोटी लोडिंग गाड़ियां हजारों में हैं जिससे लाखों
परिवारों की रोजी रोटी है। अगर सरकार ने यह बंद कर दिए तो लाखों परिवारों
का क्या होगा। रोजगार की बात करने वाली सरकार आज लाखों लोगों को सड़क पर
लाने का काम कर रही है। अगर सरकार ने बंद ही करने हैं तो हमारे साथ बात
करे। इस समस्या का मिल बैठकर हल निकाला जाए। ट्रक आपरेटरों ने कहा कि
हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर में ट्रांसपोर्टरों को गाड़ियों पर सब्सिडी दी
जाती है व कम ब्याज पर पैसा दिया जाता है। इस दौरान राज्य सरकार से आग्रह
किया गया कि पांच साल में 0 प्रतिशत ब्याज में गाड़ियां दी जाएं। इसके
अलावा उन्होंने मांग की कि परमिट अवधि तक वाहनों को चलने दिया जाए। इस मौके
पर अपार सिंह किशन गढ़, मेंबर एचएसजीएमसी, नरिंदर पंजरथ, देवी गुप्ता,
गुरविंद्र कत्याल, कश्मीर सिंह, गोगा सिंह, हरदीप वडेरा, हरबंस सिंह, मुखी
बेदी, सतबीर मान, अशोक कुमार, विजय कुमार, हंस राज, हैप्पी राजेश्वर, सतबीर
मान, जगदीश कुमार, नरिंद्र कुमार, धर्मवीर व संजय बत्तरा मीडिया सलाहकार
उपस्थित रहे।
पांच तक का अल्टीमेटम नहीं तो हड़ताल
प्रधान पीएस
बेदी चेताया कि अगर पांच जुलाई तक सरकार ने उनसे बात कर हल नहीं निकाला तो
मजबूरन ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट का सहारा लेना पडे़गा, इसकी जिम्मेदारी राज्य
सरकार की होगी।
आज चंडीगढ़ में बैठक
बेदी ने बताया कि 25 जून
को ऑल हरियाणा ट्रांसपोर्ट यूनियन की रोहतक में मीटिंग हुई, जिसमें यह
फैसला किया गया कि हरियाणा सरकार मिल बैठकर बातचीत करे और इस समस्या का हल
निकाले। इस मसले पर शनिवार को चंडीगढ़ में प्रदेशस्तरीय बैठक है। बैठक में
आगे की रणनीति तय की जाएगी।
विभाग के आदेश मिले हैं। दस
साल पुराने डीजल वाहन और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के फिटनेस
सर्टिफिकेट पर रोक लगा दी गई है। फिलहाल ऐसे वाहनों की पासिंग नहीं की जा
रही है। पुराने वाहनों की लिस्ट तैयार की जाएगी, इस पर काम चल रहा है।
योगेश कुमार, आरटीए सचिव