पशु तस्करी में संलिप्त करनाल पुलिस के दस पुलिस अधिकारियों पर केस दर्ज किया गया है। मोबाइल कॉल्स ने पशु तस्करों से इन अधिकारियों के तार जोड़े, जिसके चलते पुलिस विभाग को इन अधिकारियों की कारगुजारियों का पता चला।
हरियाणा पुलिस के एडीजीपी वी कामराज ने इसका खुलासा किया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के नाम उजागर करने से फिलहाल मना कर दिया।
उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया है कि इसमें और पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल नहीं होंगे। उन्होंने संकेत दिए कि इनमें सिपाही से लेकर एसआई स्तर तक के अधिकारी हैं।
एडीजीपी वी कामराज ने कहा कि पशु तस्करी को रोकने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में विशेष टॉस्क फोर्स गठित की गई है। पशु तस्करी के बढ़ते मामलों को देखते हुए तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच शुरू की गई।
उनके फोन ट्रैकिंग पर लगाए गए और उसकी बेहद बारीकी से मानीटरिंग की गई। पशु तस्करों से फोन पर निरंतर बातचीत का पता चला और घटनाओं से तार जुड़े पाए गए। इनमें प्राथमिक तौर पर दस पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया गया है।
उन्हें थाना सिविल लाइन में धारा 7,8,13(1)डी, 13(2) भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, काउ स्लॉटर एक्ट, 11 डी पशु क्रूरता अधिनियम व 120 बी के तहत पशु तस्करों के साथ संलिप्त पाए गए हैं। पुलिस कर्मचारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
चार क्षेत्रों में बांटा है प्रदेश
वी कामराज ने बताया कि पशु तस्करी को रोकने के लिए बनाया गया विशेष फोर्स पशुक्रूरता अधिनियम काउ स्लाटर से संबंधित अपराधियों की धरपकड़ कर रहा है। अभियान के तहत हरियाणा को चार क्षेत्रों मे बांटा गया है।
प्रत्येक क्षेत्र में संबंधित जिलों मे विशेष दस्तों को इकट्ठा कर संयुक्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि एसपी करनाल शशांक आनंद की देखरेख में इस अभियान को चलाया जा रहा है। उत्तरी जोन में करनाल के अतिरिक्त अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल व यमुनानगर जिले को शामिल किया गया है।
अभियान के तहत इन सभी जिलों के पुलिस कर्मी आरोपियों की धरपकड़ करेंगे। वी कामराज ने बताया कि यह पुलिस अधिकारी पशु तस्करों को राज्य की सीमा से बाहर तक छोड़कर आते थे ताकि रास्ते में कोई रुकावट न आए।
नहीं बख्शे जाएंगे पुलिस कर्मी
वी कामराज ने बताया कि एसपी शशांक आनंद के दिशा-निर्देश पर सभी अधिकारी व कर्मचारी काम करेंगे। पशु तस्कारी में संलिप्त पाए गए किसी भी पुलिस कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामले दर्ज किया जा रहे हैं।