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दस घंटे तक नहीं मिला इलाज, मौत से जूझती रही दुराचार पीड़ित बच्ची

Thu, 29 May 2014 12:27 AM IST
अमर उजाला/ब्यूरो, करनाल
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घरौंडा के फुरलक गांव की चौथी कक्षा की बच्ची से हुए दुराचार के बाद भी बच्ची को बेहतर इलाज नहीं मिला। मंगलवार रात से सुबह तक लगभग दस घंटे तक मासूम इलाज के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तड़पती रही।
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अधिक खून बहने के कारण वह रातभर जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही। बच्ची के परिजन बेहतर इलाज देने की गुहार लगाते हुए बिलखते रहे, लेकिन इस दौरान न डॉक्टर का दिल पसीजा और न ही नर्स का। इस स्थिति को देखकर जच्चा-बच्चा वार्ड में दर्जनों महिलाओं के आंखों में आंसू आ गए।

रातभर बच्ची जच्चा-बच्चा वार्ड में एक बेड पर दो महिलाओं के बीच रही। वार्ड में पर्याप्त बेड नहीं है। जिस कारण इस तरह की दुर्गति का सामना करना पड़ता है।

घराैंडा के फुरलक गांव में कक्षा चौथी की बच्ची स्कूल से घर जा रही थी। रास्ते में एक गाड़ी में उसका अपहरण कर दुराचार किया। मूनक मोड़ पर छोड़कर फरार हो गए।
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इस दौरान बच्ची की हालत गंभीर बनी रही। घरौंडा अस्पताल में बच्ची को लाया गया। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उसे रात करीब साढ़े नौ बजे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

बच्ची के ताऊ ओमप्रकाश ने बताया कि डॉक्टरों ने बच्ची को जच्चा-बच्चा वार्ड में दाखिल कर दिया। उसे अलग से बेड तक नहीं दिया गया। रात 11 बजे नर्स ने ग्लूकोज लगाई।

बुधवार सुबह करीब साढ़े सात बजे महिला डॉक्टर चिम्मी ने बच्ची को संभाला और ब्लड के सैंपल लेकर लेबोरेट्री से टेस्ट के लिए बोल दिया।

इस पर बच्ची के परिजन मना कर गए और जांच मेडिकल कॉलेज में टेस्ट करने को कहा। डॉक्टर ने यहां तक कह दिया कि सर्जरी के बाद ही अलग बेड मिलेगा।

इससे परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया और डॉक्टरों की ओर से बरती गई लापरवाही के खिलाफ रोष जताया। आठ बजे अल्ट्रासाउंड किया गया।

डेढ़ घंटे में की सर्जरी
परिजनों के हंगामे के बाद डॉक्टरों का पैनल बनाया और दो डॉक्टरों की मौजूदी में सर्जरी कराई गई। सुबह आठ से साढ़े नौ बजे तक स्त्री रोग विशेषज्ञ और सर्जन ने सर्जरी की।

डेढ़ घंटे में हुई सर्जरी के बाद बच्ची की तबीयत में सुधार है। अगर सर्जरी रात को ही समय पर हो जाती तो बच्ची हालत बेहतर रहती। बच्ची को ब्लीडिंग अधिक थी।

कहीं कोई अनहोनी हो जाती तो उसका जिम्मेदार कौन होता। डॉक्टरों की इलाज में इस तरह की लापरवाही बरतना ठीक नहीं है।

मौके पर पहुंचे फाइट फॉर जस्टिस क्लब ऑफ  इंडिया के चेयरमैन एडवोकेट हरीश आर्य, लखन कामरा, रोहित भार्गव, नाथी राम आर्य और रजत खन्ना ने बताया कि कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में स्टाफ  और पुलिस ने पीड़ित के साथ नाइंसाफी की है।

इनके खिलाफ  कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। रेप पीड़ित बच्ची को अलग कमरे में रखा जाना चाहिए था और मानवता के नाते बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जानी चाहिए थीं।

अस्पताल में इंजेक्शन भी नहीं मिला
सर्जरी के बाद मासूम बच्ची को एक इंजेक्शन लगाया जाना था। डॉक्टर ने जो इंजेक्शन पर्ची पर लिखा वह अस्पताल के मेडिकल स्टोर में उपलब्ध नहीं था। अस्पताल में गरीब मरीजों को अक्सर बाहर से महंगे दामों पर इसी तरह दवाई और इंजेक्शन खरीदने पड़ते हैं।

मामला बढ़ने पर दिया प्राइवेट रूम
बच्ची के दुराचार का मामला पहले ही हर किसी के रौंगटे खड़े कर रहा है। ऊपर से मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का ऐसे रवैया देखकर हर किसी को गुस्सा आना तय है।

बुधवार सुबह परिजनों द्वारा किए हंगामे के बाद मेडिकल कॉलेज के अफसर भी हरकत में आ गए। इसके बाद बच्ची को प्राइवेट रूम में फ्री ऑफ कोस्ट दाखिल किया।

नहीं लगा मासूम बच्ची के गुनाहगार का सुराग
घरौंडा। विश्राम गृह पर हुए दुराचार के मामले में पुलिस उलझी हुई थी कि गांव फुरलक में एक चौथी की छात्रा के साथ हुए दुराचार की गुत्थी भी अब पुलिस के गले की फांस बन गई है।

छात्रा के साथ हुए दुराचार के मामले में इस्तेमाल की गई इनेवो गाड़ी व चालक अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर है। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने चार टीम गठित की हैं और टीमों ने बुधवार को करनाल व पानीपत जिलो में छापेमारी की है।

पुलिस का दावा है कि शीघ्र मामले में सफलता हासिल कर लेंगे। गौरतलब है कि मंगलवार को दोपहर बाद लगभग दो बजे स्कूल से छुट्टी होने के बाद आठ साल की यह बच्ची घर सहलियों के साथ पैदल आ रही थी कि एक इनोवा चालक स्कूल से कुछ दूरी से ही छात्रा का अपहरण कर उसे लेकर फरार हो गया।

मूनक गांव के पास अपहरणकर्ता ने उसके साथ दुराचार कर बच्ची को झाड़ियों में फेंककर फरार हो गया। पुलिस ने दो घंटे के बाद छात्रा को बरामद कर लिया लेकिन आरोपी पकड़ से बाहर है। अधिक ब्लीडिंग से छात्रा की हालत नाजुक हो गई। उसे स्थानीय सामुदायिक केंद्र में भर्ती कराया गया।

इसके बाद उसे करनाल के ट्रामा सेंटर भेजा गया। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए रात को ही चार टीमें गठित कर दी थी। टीमों ने पूरी रात पूरे क्षेत्र को खंगाला लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हो सका।

बुधवार को भी सारी टीमें पानीपत, समालखा, असंध व दूसरे क्षेत्रों में आरोपी की तलाश में निकल गई थी। थाना प्रभाी गुरविंद्र सिंह ने बताया कि मामले को सुुलझाने के लिए चार टीमें गठित कर रखी हैं। आरोपी की इनोवा गाड़ी व आरोपी की पहचान करने के लिए कई स्थानों पर छापेमारी की गई है।
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