संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्रदेश में जनगणना ड्यूटी में व्यस्त शिक्षकों के कारण स्कूलों का नामांकन अभियान प्रभावित हो रहा है। स्टाफ की कमी से घर-घर संपर्क धीमा पड़ा, जिससे ड्रॉपआउट बच्चों तक पहुंच बाधित हुई और नए नामांकन अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाए। ऐसे में शिक्षा विभाग ने अब अभियान को सख्ती से लागू करते हुए जमीनी स्तर पर फोकस बढ़ा दिया है।
अब हर बच्चे की ट्रैकिंग, अभिभावकों से संवाद और वार्ड स्तर पर शिविर लगाकर बच्चों को स्कूल से जोड़ने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया गया है। विभाग ने कहा कि नामांकन अभियान के तहत स्कूलों को अपने क्षेत्र के सभी ड्रॉपआउट बच्चों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें उन बच्चों को भी शामिल किया जा रहा है, जिन्होंने कभी स्कूल में दाखिला नहीं लिया या बीच में पढ़ाई छोड़ दी।
- घर-घर किया जा रहा संवाद
जिन क्षेत्रों में बच्चों की कमी है, वहां पर शिक्षक और स्टाफ घर-घर जाकर अभिभावकों से सीधा संवाद कर रहे हैं। खासकर जिन 26 स्कूलों में 20 से कम विद्यार्थी हैं, वहां अधिक फोकस किया जा रहा है।
- लक्ष्य तय, रोजाना होगी रिपोर्टिंग
प्रत्येक स्कूल को ड्रॉपआउट बच्चों को दोबारा जोड़ने का लक्ष्य दिया है। नियमित समीक्षा बैठकें होंगी और मुख्यालय स्तर पर रोजाना रिपोर्टिंग अनिवार्य की गई है, ताकि जिलेवार स्थिति पर नजर रखी जा सके।
- स्कूल माहौल सुधारने पर जोर
विभागीय समीक्षा में सामने आया है कि केवल योजनाएं देने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे थे। अब स्कूल में पढ़ाई को रोचक बनाने, सह-पाठयक्रम बढ़ाने और माहौल बेहतर करने पर भी फोकस किया जा रहा है।
वर्जन-
अभियान में पंचायत प्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवी समूहों को भी जोड़ा जा रहा है ताकि अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई जा सके। खंड़ शिक्षा अधिकारियों की बैठक की गई है। ड्रॉपआउट की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाने का प्रयास है।
- नीलम कुंडू, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी