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टपराना गांव की छात्राओं को दिया 10 दिन का आश्वासन

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करनाल: टपराना गांव में पंचायत करने पहुचे डीसी और एसपी। मंदिर में मौजुद छात्राऐं और गांव के लोग।
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स्कूल को अपग्रेड कराने को लेकर आंदोलित छात्राओं के आगे झुकते हुए आखिरकार एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया और डीसी विनय प्रताप सिंह गांव पहुंचे। करीब दो घंटे तक डीसी ग्रामीणों और छात्राओं को मनाने में जुटे रहे। आखिरकार डीसी ने आश्वासन दिया कि आगामी दस दिनों में स्कूल अपग्रेड कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस पर ग्रामीणों ने अनशन तो खत्म कर दिया, लेकिन चेताया कि अगर इस अवधि में उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे दोबारा से चंडीगढ़ सीएम हाउस के लिए कूच करेंगे। इसके साथ ही डीसी एसपी के साथ हुई बैठक में आगामी दस दिन तक विद्यार्थियों को लाने-ले जाने के लिए बस की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही टिकरी के स्कूल में लड़कियों के अलग सेक्शन बनाया जाएगा और स्कूल के बाहर पीसीआर तैनात रहेगी।
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बता दें कि रविवार को स्कूल अपग्रेड की मांग को लेकर टपराना गांव की छात्राएं चंडीगढ़ सीएम से मिलने के लिए पैदल चल पड़ी थी। प्रशासन ने उनको रास्ते में रोकने का प्रयास किया था, लेकिन छात्राएं लिखित में आश्वासन की मांग पर अड़ी हुई थी। एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया ने उनको आश्वासन दिया था कि सोमवार को वह खुद डीसी के साथ उनके गांव में आएंगे और उनकी समस्याओं पर बातचीत करेंगे। तब जाकर छात्राएं गांव लौटी थीं।
ग्रामीणों ने डीसी के सामने रखीं समस्याएं
सोमवार को एसपी व डीसी सुबह 11 बजे गांव टपराना पहुंचे और ग्रामीणों के साथ करीब दो घंटे बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। इस मौके पर कैलाश, टीकरी गांव के लोग भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने डीसी को बताया कि गांव की छात्राएं टीकरी में पढ़ने के लिए जाती हैं और वहां के शरारती तत्व उनके साथ छेड़छाड़ करते हैं। बीच रास्ते में उनका रास्ता रोकते हैं। इस कारण छात्राएं प्रदर्शन करने पर मजबूर हुई हैं। वह अपनी समस्या को लेकर पिछले सात दिनों से धरने पर बैठी हैं। अधिकारी आते तो हैं, लेकिन 15 दिन का समय देते हैं। उन्होंने अधिकारियों को कहा था कि यदि डीसी आकर उन्हें आश्वासन दें दे तो वह प्रदर्शन खत्म कर देंगी। इसलिए उन्होंने चंडीगढ़ सीएम से पैदल जाकर मिलने का निर्णय लिया था। ग्रामीणों ने बताया कि उनके स्कूल को अपग्रेड कर दिया जाए, ताकि छात्राएं सही ढंग से पढ़ाई कर सकें। कई छात्राएं इसी समस्या को लेकर स्कूल जाना छोड़ गई हैं। यदि स्कूल अपग्रेड नहीं हुआ तो बाकी की छात्राओं को भविष्य भी खराब हो जाएगा। डीसी ने उनको 10 दिन का आश्वासन दिया और कहा कि बेटियों को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनकी सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से टीकरी स्कूल के बाहर व टपराना से टीकरी गांव के बीच पीसीआर तैनात करवाई जाएगी। यदि कोई उनके साथ छेड़छाड़ करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीसी के आश्वासन के बाद छात्राओं व ग्रामीणों ने अनशन खत्म किया और प्रशासन का धन्यवाद किया। इस मौके पर डीएसपी राजीव, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी राजपाल, नायब तहसीलदार हवा सिंह, सदर थाना एसएचओ बलजीत, टीकरी गांव सरपंच हंसराज, नरेश गोरसी, शिव कुमार, रविंद्र चौहान, कैलाश राकेश पोसवाल, ईलम सिंह, मानसिंह व बाग सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
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ग्रामीणों ने रखीं ये मांगें
- स्कूल 10 दिन तक अपग्रेड होना चाहिए
- टीकरी स्कूल में छात्राओं के लिए अलग से सेक्शन होना चाहिए
- बच्चों के लिए टीकरी गांव तक बस की सुविधा
- स्कूल के बाहर और रास्ते में गश्त करे पीसीआर
प्रशासन होगा जिम्मेदार
ग्रामीण बतेरी, संतोष, रोशनी, कृष्णा व सुमन ने कहा कि यदि छात्राओं के साथ दिए गए आश्वासन के दौरान कोई अनहोनी होती है तो प्रशासन उसका जिम्मेदार होगा। उसके बाद वह छात्राओं को बाहर पढ़ने के लिए नहीं भेजेंगी और आठ सितंबर को रोहतक में होने वाली प्रधानमंत्री की रैली में जाकर उनको अपनी समस्याओं से अवगत करवाएंगे। वह दस दिन का इंतजार करेंगे। यदि उनकी मांग 10 दिन तक पूरी नहीं हुई तो वह बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगी। ग्रामीणों ने चेताया कि वे दोबारा से चंडीगढ़ सीएम हाउस के घेराव के लिए जा सकते हैं।
एक सप्ताह से आंदोलन पर हैं छात्राएं
छात्राएं समीप लगते गांव टीकरी में पढ़ने के लिए जाती हैं। जहां युवकों की छेड़खानी की वजह से परेशान होने के बाद उन्होंने स्कूल जाना छोड़ दिया। 26 अगस्त को छात्राओं ने गांव से जिला सचिवालय तक सात किलोमीटर पैदल चलकर गई थी। प्रशासन को अपनी समस्या व मांग से अवगत करवाया था। 27 सितंबर को एसडीएम इंद्री सुमित सिहाग व 29 सितंबर को एसडीएम करनाल नरेंद्र पाल मलिक गांव टपराना गए थे। छात्राओं व ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया था। 18 दिन में स्कूल अपग्रेड करने का आश्वासन दिया था। गांव में तब से लगातार बैठके जारी हैं। 1 सितंबर को ग्रामीण बच्चों के साथ चंडीगढ़ के लिए पैदल चल दिए थे।
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